Saturday 9 March 2013

हिन्दू धर्म का सच या झूठ


 

हिन्दू  अरबी का शब्द है । हिन्दू शब्द न तो वेद में है न पुराण में नउपनिषद में न आरण्यक में न रामायण

 में न ही महाभारत में । स्वयं दयानन्द सरस्वती कबूल करते हैं कि यह मुगलों द्वारा दी गई गाली है । 

1875 में ब्राह्मण दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की हिन्दू समाज की नहीं । अनपढ़ ब्राह्मण 

भी यह बात जानता है । ब्राह्मणो ने स्वयं को हिन्दूकभी नहीं कहा । आज भी वे स्वयं को ब्राह्मण कहते हैं 

लेकिन सभी शूद्रों को हिन्दू कहते हैं । जब शिवाजी हिन्दू थे और मुगलों के विरोध में लड़ रहे थे तथा 

तथाकथित हिन्दू धर्म के रक्षक थे तब भी पूना के ब्राह्मणो ने उन्हें शूद्र कह राजतिलक से इंकार कर दिया। 

घूस का लालच देकर ब्राह्मण गागाभट्ट को बनारस से बुलाया गया ।गगाभट्ट ने"गागाभट्टी" लिखा उसमें 

उन्हें विदेशी राजपूतों का वंशज बताया तो गया लेकिन राजतिलक के दौरान मंत्र "पुराणों" के ही पढे गए 

वेदों के नहीं ।तो शिवाजी को हिन्दू तब नहीं माना । ब्राह्मणो ने मुगलों से कहा हम हिन्दू नहीं हैं बल्कि 

तुम्हारी तरह ही विदे

सिन्धु से हिन्दू बना है, बहुत से लोग "स" को "ह" और "य" जो "ज" बोलते हैं. सिन्धु नदी के दक्षिण और 

हिमालय के दक्षिण मे रहने वालों को "सिंधू / हिन्दू" कहा गया. इस क्षेत्र के रहने वाले सभी लोग "सिंधू / 

हिन्दू" हैं. हम भी उन्हीं में से हैं, राष्ट्री यता हमारी, भारतीय है, धर्म हमारा इस्लाम है. स्वामी विवेकानन्द, 

जो स्वयं आर्य समाजी थे, ने कहा कि हिन्दू शब्द एक " मीसनॉमा " (गलत दिया हुआ नाम) है, सही मायनों 

में में "वेदान्ती" होना चाहिये. इस्लाम केवल मुसलमानों के लिये नहीं, सारी क़ायनात के लिये है, दुनियाँ के 

हर व्यक्ति के लिये है. इस्लाम का अर्थ है, "अपनी ईक्षाओं को अल्लाह / ईश्वर की ईक्षा को समर्पित कर देना 

अर्थात्, ईश्वर के बताये हुए क़ानून के हिसाब से चलना. जो इसको अपना लेता है, उसको मुसलमान कहते 

हैं. इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जो गैर मुस्लिमों को न सिर्फ जीने का अधिकार देता है बल्कि उनकी आर्थिक, 

शारीरिक, पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा का भी प्रबंध करता है. एक मुसलमान यदि खाना खा कर सो 

जाता है और उसका पड़ोसी (चाहे किसी भी धर्म का हो) भूखा सो गया तो मुसलमान का खाना हराम हो 

जाता है, (आस-पास के 40 घर पड़ोसी होते हैं). ज़कात, जज़ियाह, फ़ितरा, सदक़ा और दान यह सब इसी 

लिये हैं. आज़ादी के बाद "हिन्दू पॅनल कोड नहीं" "इंडियन / भारतीय पॅनल कोड" बना. उसमें अलग-अलग 

मज़हब के लिये अलग-अलग प्रावधान किये गये. मुस्लिम के पास अपनी एक बेहतरीन क़ानून व्यवस्था थी 

इस लिये उसको मुस्लिम पर्सानला ला की तरह ले लिया, क्यूंकि हिन्दू व्यवस्था में कोई ऐसा क़ानून नहीं 

था, तो उस के लिये एक क़ानून बनाना पड़ा. "हिन्दू मेरिज एक्ट" और टॅक्स के लिये "हिन्दू अविभाजित 

परिवार" की व्यवस्था इस का उदाहरण हैं. हम मुसलमान समान सिविल कोड के लिये तैय्यार हैं, लेकिन 

उस के लिये पहले विद्वानों को बैठा कर संवाद होना चाहिये और सबसे अच्छी व्यवस्था ले ली जाये. अगर 

यह साबित हो गया कि फेरों की जगा "निकाह" और शव को जलाने की जगह दफनाना सही है तो, सब को 

मानना पड़ेगा. बात धर्म शास्त्रों के आधार पर होगी न कि अपनी-अपनी आस्था और कहते हैं सुनते हैं और 

मान्यता है के आधार पर. -- अंत में आप को खुली चुनौती है कि क़ुरान से एक भी बात, रेफरेन्स और संदर्भ 

के साथ, मानवता के विरुद्ध बता दें
सिन्धु से हिन्दू बना है, बहुत से लोग "स" को "ह" और "य" जो "ज" बोलते हैं. सिन्धु नदी के दक्षिण और 

हिमालय के दक्षिण मे रहने वालों को "सिंधू / हिन्दू" कहा गया. इस क्षेत्र के रहने वाले सभी लोग "सिंधू / 

हिन्दू" हैं. हम भी उन्हीं में से हैं, राष्ट्री यता हमारी, भारतीय है, धर्म हमारा इस्लाम है. स्वामी विवेकानन्द, 

जो स्वयं आर्य समाजी थे, ने कहा कि हिन्दू शब्द एक " मीसनॉमा " (गलत दिया हुआ नाम) है, सही मायनों 

में में "वेदान्ती" होना चाहिये. इस्लाम केवल मुसलमानों के लिये नहीं, सारी क़ायनात के लिये है, दुनियाँ के 

हर व्यक्ति के लिये है. इस्लाम का अर्थ है, "अपनी ईक्षाओं को अल्लाह / ईश्वर की ईक्षा को समर्पित कर देना 

अर्थात्, ईश्वर के बताये हुए क़ानून के हिसाब से चलना. जो इसको अपना लेता है, उसको मुसलमान कहते 

हैं. इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जो गैर मुस्लिमों को न सिर्फ जीने का अधिकार देता है बल्कि उनकी आर्थिक, 

शारीरिक, पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा का भी प्रबंध करता है. एक मुसलमान यदि खाना खा कर सो 

जाता है और उसका पड़ोसी (चाहे किसी भी धर्म का हो) भूखा सो गया तो मुसलमान का खाना हराम हो 

जाता है, (आस-पास के 40 घर पड़ोसी होते हैं). ज़कात, जज़ियाह, फ़ितरा, सदक़ा और दान यह सब इसी 

लिये हैं. आज़ादी के बाद "हिन्दू पॅनल कोड नहीं" "इंडियन / भारतीय पॅनल कोड" बना. उसमें अलग-अलग 

मज़हब के लिये अलग-अलग प्रावधान किये गये. मुस्लिम के पास अपनी एक बेहतरीन क़ानून व्यवस्था थी 

इस लिये उसको मुस्लिम पर्सानला ला की तरह ले लिया, क्यूंकि हिन्दू व्यवस्था में कोई ऐसा क़ानून नहीं 

था, तो उस के लिये एक क़ानून बनाना पड़ा. "हिन्दू मेरिज एक्ट" और टॅक्स के लिये "हिन्दू अविभाजित 

परिवार" की व्यवस्था इस का उदाहरण हैं. हम मुसलमान समान सिविल कोड के लिये तैय्यार हैं, लेकिन 

उस के लिये पहले विद्वानों को बैठा कर संवाद होना चाहिये और सबसे अच्छी व्यवस्था ले ली जाये. अगर 

यह साबित हो गया कि फेरों की जगा "निकाह" और शव को जलाने की जगह दफनाना सही है तो, सब को 

मानना पड़ेगा. बात धर्म शास्त्रों के आधार पर होगी न कि अपनी-अपनी आस्था और कहते हैं सुनते हैं और 

मान्यता है के आधार पर. -- अंत में आप को खुली चुनौती है कि क़ुरान से एक भी बात, रेफरेन्स और संदर्भ 

के साथ, मानवता के विरुद्ध बता दें

सिन्धु से हिन्दू बना है, बहुत से लोग "स" को "ह" और "य" जो "ज" बोलते हैं. सिन्धु नदी के दक्षिण और 

हिमालय के दक्षिण मे रहने वालों को "सिंधू / हिन्दू" कहा गया. इस क्षेत्र के रहने वाले सभी लोग "सिंधू / 

हिन्दू" हैं. हम भी उन्हीं में से हैं, राष्ट्री यता हमारी, भारतीय है, धर्म हमारा इस्लाम है. स्वामी विवेकानन्द, 

जो स्वयं आर्य समाजी थे, ने कहा कि हिन्दू शब्द एक " मीसनॉमा " (गलत दिया हुआ नाम) है, सही मायनों 

में में "वेदान्ती" होना चाहिये. इस्लाम केवल मुसलमानों के लिये नहीं, सारी क़ायनात के लिये है, दुनियाँ के 

हर व्यक्ति के लिये है. इस्लाम का अर्थ है, "अपनी ईक्षाओं को अल्लाह / ईश्वर की ईक्षा को समर्पित कर देना 

अर्थात्, ईश्वर के बताये हुए क़ानून के हिसाब से चलना. जो इसको अपना लेता है, उसको मुसलमान कहते 

हैं. इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जो गैर मुस्लिमों को न सिर्फ जीने का अधिकार देता है बल्कि उनकी आर्थिक, 

शारीरिक, पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा का भी प्रबंध करता है. एक मुसलमान यदि खाना खा कर सो 

जाता है और उसका पड़ोसी (चाहे किसी भी धर्म का हो) भूखा सो गया तो मुसलमान का खाना हराम हो 

जाता है, (आस-पास के 40 घर पड़ोसी होते हैं). ज़कात, जज़ियाह, फ़ितरा, सदक़ा और दान यह सब इसी 

लिये हैं. आज़ादी के बाद "हिन्दू पॅनल कोड नहीं" "इंडियन / भारतीय पॅनल कोड" बना. उसमें अलग-अलग 

मज़हब के लिये अलग-अलग प्रावधान किये गये. मुस्लिम के पास अपनी एक बेहतरीन क़ानून व्यवस्था थी 

इस लिये उसको मुस्लिम पर्सानला ला की तरह ले लिया, क्यूंकि हिन्दू व्यवस्था में कोई ऐसा क़ानून नहीं 

था, तो उस के लिये एक क़ानून बनाना पड़ा. "हिन्दू मेरिज एक्ट" और टॅक्स के लिये "हिन्दू अविभाजित 

परिवार" की व्यवस्था इस का उदाहरण हैं. हम मुसलमान समान सिविल कोड के लिये तैय्यार हैं, लेकिन 

उस के लिये पहले विद्वानों को बैठा कर संवाद होना चाहिये और सबसे अच्छी व्यवस्था ले ली जाये. अगर 

यह साबित हो गया कि फेरों की जगा "निकाह" और शव को जलाने की जगह दफनाना सही है तो, सब को 

मानना पड़ेगा. बात धर्म शास्त्रों के आधार पर होगी न कि अपनी-अपनी आस्था और कहते हैं सुनते हैं और 

मान्यता है के आधार पर. -- अंत में आप को खुली चुनौती है कि क़ुरान से एक भी बात, रेफरेन्स और संदर्भ 

के साथ, मानवता के विरुद्ध बता दें

Thursday 23 August 2012

मुसलमानों को मारा और चलती ट्रेन से बाहर फेक दिया





पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ फैली अफवाह और दहशत के बीच बैंगलौर से असम के लिए जा रही एक विशेष ट्रेन में इकठ्ठा हुई भीड़ ने पहले तो लोगों के आई-कार्ड चेक किए और फिर मार-पीट पर ट्रेन से बाहर फेंक दिया.रोंगटे खड़े कर देने वाली ये घटना है पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी की जहां शनिवार को उग्र भीड़ ने ट्रेन के एक डिब्बे के दरवाजों को अंदर से बंद कर दिया. ट्रेन के बंद कंपार्टमेंट में मुसलमानों को चिन्हित कर उनके साथ मारपीट की गई.यात्रियों के साथ लूटपाट और मारपीट के दौरान 14 लोगों को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दस बुरी तरह से घायल हो गए. ये सभी मुसलमान थे.इस मामले पर राज्य पुलिस या रेलवे पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.मारे गए लोगों के शव और घायलों को जलपाईगुड़ी के फलाकट और बेलाकोबा स्टेशनों के पास पाया गया.

बैंगलौर में गार्ड का काम करने वाले 22 वर्षीय शाहजहान अहमद चौधरी भी इसी ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे. शनिवार को उनके साथ भी मारपीट की गई, जिसके बाद वो नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती हैं.इस सम्बन्ध में पीड़ित के भाई ने बताया "ट्रेन के डिब्बे में सवार सभी लोगों के पहचान पत्र जांचे गए और वहा मिले 14 मुसलमानों को 40-45 लोगों की उग्र भीड़ ने अलग-थलग कर दिया. सभी दरवाजे बंद कर दिए गए और 14 लोगों को भीड़ मारने-पीटने लगी.

हमले के बारे में शाहजहान ने ट्रेन में रहते हुए अपने बड़े भाई जिलान अहमद चौधरी बता दिया था.जिलान अहमद चौधरी के अनुसार "भीड़ के द्वारा चिन्हित किए गए हमारे क्षेत्र के लोगों से मोबाइल फोन और पैसे छीन लिए गए. मार पीट करने वाले लोग धमकी दे रहे थे कि वो चिन्हित किए गए लोगों का गला काट देंगे और ट्रेन से फेंक देंगे. करीब दो-ढ़ाई घंटे तक मारपीट के बाद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया.बताया जाता है की घटना के वक्त पुलिस वहां नही थी और डिब्बे का दरवाजा बंद होने के कारण दूसरे लोग भी वहां नहीं पहुंच पाए."
बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टाशाली ने जिलान चौधरी से बात की.
अपने भाई शाहजहान के ब्यौरे को याद करते हुए जिलान अहमद ने कहा, “ट्रेन के डिब्बे में सवार सभी लोगों के पहचान पत्र जांचे गए और वहा मिले 14 मुसलमानों को 40-45 लोगों की उग्र भीड़ ने अलग-थलग कर दिया. सभी दरवाजे बंद कर दिए गए और 14 लोगों को भीड़ मारने-पीटने लगी.”
उन्होंने आगे कहा, “भीड़ के द्वारा चिन्हित किए गए हमारे क्षेत्र के लोगों से मोबाइल फोन और पैसे छीन लिए गए. मार पीट करने वाले लोग धमकी दे रहे थे कि वो चिन्हित किए गए लोगों का गला काट देंगे और ट्रेन से फेंक देंगे. करीब दो-ढ़ाई घंटे तक मारपीट के बाद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया.”
जिलान अहमद के अनुसार ट्रेन में सवार उनके भाई ने फोन पर उन्हें बताया था कि हिंसक हो चुकी भीड़ में शामिल लोग उसी ट्रेन के यात्री थे और बैंगलौर से ही ट्रेन में सवार हुए थे.
जिलान ने कहा, “घटना के वक्त पुलिस वहां नही थी और डिब्बे का दरवाजा बंद होने के कारण दूसरे लोग भी वहां नहीं पहुंच पाए.”

घायलों की हालत नाजुक

मारे गए चारों लोगों को मंगलवार को उनके गांवों में दफना दिया गया, जबकि बाकी दस का सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में उपचार किया जा रही है, जहां उनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है.
असम के हैलाकांडी जिले के पुलिस अधीक्षक ब्रजेनजीत सिंघा ने कहा, “मारे गए चारों लोगों की अंत्येष्टी में करीब छह हजार लोग इकठ्ठा हुए, इलाक़े में तनाव है लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.”
पुलिस का कहना है कि जाकिर हुसैन नाम का एक युवक भी उसी ट्रेन में यात्रा कर रहा था जो हमले के बाद से गायब है.
उत्तर-पूर्व फ्रंटीयर रेल के प्रवक्ता एसएस हाजोंग ने कहा, “ट्रेन में आरपीएफ के दस विशेष तौर पर प्रशिक्षित जवान और पांच रेलवे पुलिस के जवान तैनात थे, लेकिन बंद दरवाजों के बीच क्या हो रहा था ये किसी ने सुरक्षाकर्मियों को नहीं बताया.” 

Friday 20 July 2012

डेरा सच्चा सौदा पर 400 सधुवो को नपुंसक बनाने का आरोप


डेरा सच्चा सौदा की मुश्किले ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रही है अब एक नया आरोप लगा है  सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में 400 साधुओं को नपुंसक बनाने के आरोपों और उसकी जाँच भी सीबीआई से करने की मांग की गई है। 
इस संबंध में दाखिल याचिका पर वीरवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, सिरसा व फतेहाबाद के एसपी व सीबीआई को 10 अक्तूबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

फतेहाबाद निवासी हंस राज चौहान की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि डेरे में रहने वाले साधुओं को सब्जबाग दिखाए गए कि नपुंसक बनने वाले साधुओं को डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह ईश्वर के दर्शन करवाएंगे।
उनके झांसे में आकर डेरे में रहने वाले लगभग 400 साधुओं ने अपना आपरेशन करवा लिया। याची ने कहा कि वह भी इन साधुओं में से एक है। उनका जीवन नर्क बन गया है। याची ने कहा कि वर्ष 1990 से वह डेरे से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2000 में ईश्वर के दर्शन करवाने के नाम पर उसके साथ करीब 20 साधुओं को नपुंसक बना दिया गया। इससे उनके शरीर में हारमोनल बदलाव आ गए हैं। लोग उन्हें नपुंसक कहकर छेड़ते हैं।
याचिका में विनोद कुमार नामक साधु का उदाहरण देकर कहा गया कि विनोद ने सिरसा कोर्ट कांप्लेक्स में आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि वह नपुंसक है। याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह 400 साधु डेरे में हैं। याचिका पर प्राथमिक सुनवाई के बाद जस्टिस महेश ग्रोवर ने हरियाणा सरकार, सिरसा व फतेहाबाद के एसपी व सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

वही डेरा के प्रवक्ता पवन इंसां और डा. आदित्य इंसां ने बताया कि डेरा विरोधी कुछ लोग डेरा के खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हंसराज चौहान उर्फ हकीकी हंस डेरा का साधु रहा है। पांच वर्षो से वह डेरा छोड़ कर जा चुका है। याचिका के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। लेकिन इसमें जो आरोप लगाए गए हैं वे निराधार हैं।अब यह तो समय बताएगा की क्या सच है और क्या झूठ मगर अभी तो फिर उंगली उठ गयी है 

डेरा में बाबा कैप्सूल खाकर मना रहे थे रंगरेलियां


होशियारपुर के एक होशियार बाबा की करतूत देख कर शैतान भी शर्मा जायेगा घटना है बुल्लोवाला की जहा एक बाबा अपने डेरे में ही रंगरलिय मन रहे थे किसी ने पास के थाने में सूचना दे डाली फिर क्या पुलिस पहुची और बाबा को नंगा गिरफ्तार किया 
.बुल्लोवाल पुलिस ने देर शाम बुल्लोवाल नंदाचौर रोड पर स्थित विख्यात डेरा आनंदगढ़ शहीद सिंघा में कथित रूप से आपत्तिजनक हालत में एक युवक व महिला के साथ डेरे के बाबा तेजा सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने डेरे के कमरे से न सिर्फ शराब व बीयर की बोतल बल्कि जोश लाने वाले कैप्सूल भी बरामद करने का दावा किया है।

यह कार्रवाई होशियारपुर की सत्कार कमेटी की सूचना पर की गई है। सोमवार देर रात डेरे में एक महिला व एक युवक को आते देख कमेटी के सदस्यों ने फौरन इसकी सूचना बुल्लोवाल पुलिस को दे दी। एसएचओ गुरविंदर सिंह ने पुलिस के साथ डेरे में पहुंच तीनों को ही गिरफ्तार कर लिया। एसएचओ गुरविंदर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में डेरे के बाबा तेजा सिंह, युवक बलजिंदर सिंह, जो ताजोवाल गांव का रहने वाला है और गिरफ्तार महिला नजदीकी गांव परागपुर की है। महिला शादीशुदा है व उसका पति व बच्चे दिल्ली में रहते हैं।

महिला पंजाब में बतौर डांसर काम करती है। बुल्लोवाल पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 295 ए के साथ इमॉरल ट्रैफिक एक्ट की धारा 3, 4 व 5 के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस कल तीनों ही आरोपियों को अदालत में रिमांड के लिए पेश करेगी।

अमरनाथ में यात्रा के दौरान पंडितो ने बनाया महिला का अश्लील MMS

दर्शन करने वाली महिलाये पहले भी असुरक्षित रहती थी जिसके अनेको उदहारण इतिहास में भरे पडे है वर्तमान में भी कई ऐसे उदहारण है परन्तु मानवता को ही कलंकित करने वाली एक घटना अमरनाथ यात्रा के दौरान सामने आयी है 
जिसमे अमरनाथ यात्रा पर जा रही महिला श्रद्धालुओं का अश्लील एमएमएस बनाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालंधर की रहने वाली एक महिला की एफआईआर के बाद श्रीनगर पुलिस ने सेवा शिविर के दो सेवादारों को हिरासत में ले लिया है। 
एफआईआर दर्ज कराने वाली महिला 11 जुलाई को बालटाल में हेलीपैड के नजदीक बने एक लंगर शिविर में गई थी। यह लंगर जालंधर की ही श्री अमरनाथ (बी) ट्रस्ट ने लगवाया था। महिला जब नहाने के लिए गई तो उसे टीन के पीछे कुछ हलचल महसूस हुई। उसने देखा टीन में बने छेद से युवक झांक रहे थे और उनके हाथ में मोबाइल भी थे। महिला के शोर मचाने पर युवक भाग गए। 
पीड़ित महिला ने घटना की पुलिस में शिकायत की तो पुलिस ने दो सेवादारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। गांदरबल के एसपी शाहिद मेहराज ने कहा, 'मोबाइल से महिला का वीडियो बनाया जा रहा था। दोनों मोबाइल सीज कर लिए गए। प्रारंभिक जांच में क्लिपिंग नहीं मिली हैं। अब मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। हिरासत में लिए गए दोनों युवकों को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पहले उन्हें 6 दिन की रिमांड पर भेजा गया था।'
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है जबकि पीड़ित महिला का कहना है कि उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन इस घटना ने धर्म के नाम पर चल रहे इन शिविरों से श्रद्धालुओं का विश्वास तोड़ दिया है। तीर्थयात्रा पर जा रहे यात्रियों को अब शिविरों में भी पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है।वरना कोई आपका कही भी कुछ भी बना सकता है और धर्म के ये ठेकेदारों का कोई कुछ भी नहीं कर सकता है 

एक कंपनी ने काली को 'पोर्न स्‍टार' के तौर पर दिखाया

अमेरिका में  हिंदुओं की कथित  देवी काली का कथित  अपमान हुआ है। वीडियो गेम बनाने वाली अमेरिका की एक कंपनी ने  काली को 'पोर्न स्‍टार' के तौर पर दिखाया गया है। मां काली का इस तरह अपमान SMITE नाम के ऑनलाइन एक्‍शन वीडियो गेम में किया गया है, जिसे जॉर्जिया के हाई-रेज स्‍टूडियोज में डेवलप किया जा रहा है। 
 
अमेरिकी कंपनी के इस कदम का यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने कड़ा विरोध किया है। यूनिवर्सल सो‍सायटी ऑफ हिंदुइज्‍म के प्रेसिडेंट राजन जेड ने कहा कि मां काली के साथ इस तरह के खिलवाड़ से उनके श्रद्धालुओं में गुस्‍सा है जो उन्‍हें पूजते हैं।
 
हिंदू जनजागृति समिति ने वीडियो गेम डेवलप करने वाली कंपनी की आलोचना करते हुए कहा है, 'इस गेम में मां काली को बड़े ही खराब तरीके से पेश किया गया है। काली माता हिंदुओं की देवी हैं और एक अरब से ज्‍यादा हिंदू इनकी पूजा करते हैं। अमेरिकी कंपनी ने हिंदू समुदाय की देवी-देवताओं का अपमान किया है क्‍योंकि देवी-देवताओं को ऑनलाइन गेम्‍स के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है।'
 
हिंदू संगठनों ने यह गेम डेवलप करने वाले स्‍टूडियो के खिलाफ दुनियाभर में विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इन संगठनों ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने के लिए बिना शर्त माफी की मांग की है। 
 
इससे पहले, अमेरिका में बीयर का नाम मां काली पर रखकर हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया था। मेरे ये नहीं समझ में अरह है की अब देश में जो कथित भगवाधारी है कहा है जाकर अमेरिका से लडते क्यों नहीं है या फिर अब चुदिया पहन ली है हाथो में 

Friday 13 July 2012

वेदों में अश्लील बातें

-वेदों में कैसी-कैसी अश्लील बातें भरी पड़ी है,इसके कुछ नमूने आगे प्रस्तुत किये जाते हैं (१) यां त्वा .........शेपहर्श्नीम || (अथर्व वेद ४-४-१) अर्थ : हे जड़ी-बूटी, मैं तुम्हें खोदता हूँ. तुम मेरे लिंग को उसी प्रकार उतेजित करो जिस प्रकार तुम ने नपुंसक वरुण के लिंग को उत्तेजित किया था.
(२) अद्द्यागने............................पसा:|| (अथर्व वेद ४-४-६) अर्थ: हे अग्नि देव, हे सविता, हे सरस्वती देवी, तुम इस आदमी के लिंग को इस तरह तान दो जैसे धनुष की डोरी तनी रहती है
(३) अश्वस्या............................तनुवशिन || (अथर्व वेद ४-४-८) अर्थ : हे देवताओं, इस आदमी के लिंग में घोड़े, घोड़े के युवा बच्चे, बकरे, बैल और मेढ़े के लिंग के सामान शक्ति दो
(४) आहं तनोमि ते पासो अधि ज्यामिव धनवानी, क्रमस्वर्श इव रोहितमावग्लायता (अथर्व वेद ६-१०१-३) मैं तुम्हारे लिंग को धनुष की डोरी के समान तानता हूँ ताकि तुम स्त्रियों में प्रचंड विहार कर सको.
(५) तां पूष...........................शेष:|| (अथर्व वेद १४-२-३८) अर्थ : हे पूषा, इस कल्याणी औरत को प्रेरित करो ताकि वह अपनी जंघाओं को फैलाए और हम उनमें लिंग से प्रहार करें.
(६) एयमगन....................सहागमम || (अथर्व वेद २-३०-५) अर्थ : इस औरत को पति की लालसा है और मुझे पत्नी की लालसा है. मैं इसके साथ कामुक घोड़े की तरह मैथुन करने के लिए यहाँ आया हूँ.
(७) वित्तौ.............................गूहसि (अथर्व वेद २०/१३३) अर्थात : हे लड़की, तुम्हारे स्तन विकसित हो गए है. अब तुम छोटी नहीं हो, जैसे कि तुम अपने आप को समझती हो। इन स्तनों को पुरुष मसलते हैं। तुम्हारी माँ ने अपने स्तन पुरुषों से नहीं मसलवाये थे, अत: वे ढीले पड़ गए है। क्या तू ऐसे बाज नहीं आएगी? तुम चाहो तो बैठ सकती हो, चाहो तो लेट सकती हो.

रामायण तो मैंने पड़ी है ओउर हमारे पुरखों ने लिखी भी है रामायण में शुरू से आखरी तक सेक्स ही सेक्स भरा है उदहारण के लिए दशरथ के ४ रानियाँ थी जिनके साथ वो सेक्स करता था लक्ष्मण को सेक्स की भूक नहीं थी इस लिए वो उर्मिला को जंगल में नहीं ले गया रावन को सेक्स की भूक थी इसलिए वो सीता को पकड़ ले गया ओउर २ साल तक अपनी सेक्स की आग भुजता रहा नरम को सेक्स की भूक बिउल्कुल भी नहीं थी तभी उन्होंने सीता को फिर जंगल में भेज दिया लव कुश सेक्स के द्वारा ही पैदा हुए बहुत कुछ है रामायण में सेक्स के बारे में