Friday, 20 July 2012

अमरनाथ में यात्रा के दौरान पंडितो ने बनाया महिला का अश्लील MMS

दर्शन करने वाली महिलाये पहले भी असुरक्षित रहती थी जिसके अनेको उदहारण इतिहास में भरे पडे है वर्तमान में भी कई ऐसे उदहारण है परन्तु मानवता को ही कलंकित करने वाली एक घटना अमरनाथ यात्रा के दौरान सामने आयी है 
जिसमे अमरनाथ यात्रा पर जा रही महिला श्रद्धालुओं का अश्लील एमएमएस बनाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालंधर की रहने वाली एक महिला की एफआईआर के बाद श्रीनगर पुलिस ने सेवा शिविर के दो सेवादारों को हिरासत में ले लिया है। 
एफआईआर दर्ज कराने वाली महिला 11 जुलाई को बालटाल में हेलीपैड के नजदीक बने एक लंगर शिविर में गई थी। यह लंगर जालंधर की ही श्री अमरनाथ (बी) ट्रस्ट ने लगवाया था। महिला जब नहाने के लिए गई तो उसे टीन के पीछे कुछ हलचल महसूस हुई। उसने देखा टीन में बने छेद से युवक झांक रहे थे और उनके हाथ में मोबाइल भी थे। महिला के शोर मचाने पर युवक भाग गए। 
पीड़ित महिला ने घटना की पुलिस में शिकायत की तो पुलिस ने दो सेवादारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। गांदरबल के एसपी शाहिद मेहराज ने कहा, 'मोबाइल से महिला का वीडियो बनाया जा रहा था। दोनों मोबाइल सीज कर लिए गए। प्रारंभिक जांच में क्लिपिंग नहीं मिली हैं। अब मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। हिरासत में लिए गए दोनों युवकों को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पहले उन्हें 6 दिन की रिमांड पर भेजा गया था।'
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है जबकि पीड़ित महिला का कहना है कि उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन इस घटना ने धर्म के नाम पर चल रहे इन शिविरों से श्रद्धालुओं का विश्वास तोड़ दिया है। तीर्थयात्रा पर जा रहे यात्रियों को अब शिविरों में भी पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है।वरना कोई आपका कही भी कुछ भी बना सकता है और धर्म के ये ठेकेदारों का कोई कुछ भी नहीं कर सकता है 

एक कंपनी ने काली को 'पोर्न स्‍टार' के तौर पर दिखाया

अमेरिका में  हिंदुओं की कथित  देवी काली का कथित  अपमान हुआ है। वीडियो गेम बनाने वाली अमेरिका की एक कंपनी ने  काली को 'पोर्न स्‍टार' के तौर पर दिखाया गया है। मां काली का इस तरह अपमान SMITE नाम के ऑनलाइन एक्‍शन वीडियो गेम में किया गया है, जिसे जॉर्जिया के हाई-रेज स्‍टूडियोज में डेवलप किया जा रहा है। 
 
अमेरिकी कंपनी के इस कदम का यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने कड़ा विरोध किया है। यूनिवर्सल सो‍सायटी ऑफ हिंदुइज्‍म के प्रेसिडेंट राजन जेड ने कहा कि मां काली के साथ इस तरह के खिलवाड़ से उनके श्रद्धालुओं में गुस्‍सा है जो उन्‍हें पूजते हैं।
 
हिंदू जनजागृति समिति ने वीडियो गेम डेवलप करने वाली कंपनी की आलोचना करते हुए कहा है, 'इस गेम में मां काली को बड़े ही खराब तरीके से पेश किया गया है। काली माता हिंदुओं की देवी हैं और एक अरब से ज्‍यादा हिंदू इनकी पूजा करते हैं। अमेरिकी कंपनी ने हिंदू समुदाय की देवी-देवताओं का अपमान किया है क्‍योंकि देवी-देवताओं को ऑनलाइन गेम्‍स के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है।'
 
हिंदू संगठनों ने यह गेम डेवलप करने वाले स्‍टूडियो के खिलाफ दुनियाभर में विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इन संगठनों ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने के लिए बिना शर्त माफी की मांग की है। 
 
इससे पहले, अमेरिका में बीयर का नाम मां काली पर रखकर हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया था। मेरे ये नहीं समझ में अरह है की अब देश में जो कथित भगवाधारी है कहा है जाकर अमेरिका से लडते क्यों नहीं है या फिर अब चुदिया पहन ली है हाथो में 

Friday, 13 July 2012

वेदों में अश्लील बातें

-वेदों में कैसी-कैसी अश्लील बातें भरी पड़ी है,इसके कुछ नमूने आगे प्रस्तुत किये जाते हैं (१) यां त्वा .........शेपहर्श्नीम || (अथर्व वेद ४-४-१) अर्थ : हे जड़ी-बूटी, मैं तुम्हें खोदता हूँ. तुम मेरे लिंग को उसी प्रकार उतेजित करो जिस प्रकार तुम ने नपुंसक वरुण के लिंग को उत्तेजित किया था.
(२) अद्द्यागने............................पसा:|| (अथर्व वेद ४-४-६) अर्थ: हे अग्नि देव, हे सविता, हे सरस्वती देवी, तुम इस आदमी के लिंग को इस तरह तान दो जैसे धनुष की डोरी तनी रहती है
(३) अश्वस्या............................तनुवशिन || (अथर्व वेद ४-४-८) अर्थ : हे देवताओं, इस आदमी के लिंग में घोड़े, घोड़े के युवा बच्चे, बकरे, बैल और मेढ़े के लिंग के सामान शक्ति दो
(४) आहं तनोमि ते पासो अधि ज्यामिव धनवानी, क्रमस्वर्श इव रोहितमावग्लायता (अथर्व वेद ६-१०१-३) मैं तुम्हारे लिंग को धनुष की डोरी के समान तानता हूँ ताकि तुम स्त्रियों में प्रचंड विहार कर सको.
(५) तां पूष...........................शेष:|| (अथर्व वेद १४-२-३८) अर्थ : हे पूषा, इस कल्याणी औरत को प्रेरित करो ताकि वह अपनी जंघाओं को फैलाए और हम उनमें लिंग से प्रहार करें.
(६) एयमगन....................सहागमम || (अथर्व वेद २-३०-५) अर्थ : इस औरत को पति की लालसा है और मुझे पत्नी की लालसा है. मैं इसके साथ कामुक घोड़े की तरह मैथुन करने के लिए यहाँ आया हूँ.
(७) वित्तौ.............................गूहसि (अथर्व वेद २०/१३३) अर्थात : हे लड़की, तुम्हारे स्तन विकसित हो गए है. अब तुम छोटी नहीं हो, जैसे कि तुम अपने आप को समझती हो। इन स्तनों को पुरुष मसलते हैं। तुम्हारी माँ ने अपने स्तन पुरुषों से नहीं मसलवाये थे, अत: वे ढीले पड़ गए है। क्या तू ऐसे बाज नहीं आएगी? तुम चाहो तो बैठ सकती हो, चाहो तो लेट सकती हो.

रामायण तो मैंने पड़ी है ओउर हमारे पुरखों ने लिखी भी है रामायण में शुरू से आखरी तक सेक्स ही सेक्स भरा है उदहारण के लिए दशरथ के ४ रानियाँ थी जिनके साथ वो सेक्स करता था लक्ष्मण को सेक्स की भूक नहीं थी इस लिए वो उर्मिला को जंगल में नहीं ले गया रावन को सेक्स की भूक थी इसलिए वो सीता को पकड़ ले गया ओउर २ साल तक अपनी सेक्स की आग भुजता रहा नरम को सेक्स की भूक बिउल्कुल भी नहीं थी तभी उन्होंने सीता को फिर जंगल में भेज दिया लव कुश सेक्स के द्वारा ही पैदा हुए बहुत कुछ है रामायण में सेक्स के बारे में

Monday, 2 July 2012

मुसलमानों के 50 से ज़्यादा घर जलाकर राख कर दिए गए


प्रतापगढ़ ज़िले के अस्थान गाँव में मुसलमानों के 46 से ज़्यादा घर जलाकर राख कर दिए गए हैं, साजिश और दुर्भावना को देखते हुए मुझे तो यकबारगी ऐसा ही लगा कि क्या यूपी में मोदी की सरकार है? मुस्लिम बहुल इलाके में घुस कर पुरे गाँव में हिन्दुओं ने उन्हें उनके घर जलाने के बाद खदेड़ कर गाँव के बाहर कर दिया और सभी लोगों लोगों को मजबूरन पास के बारे इलाके में स्थित एक मदरसे में पनाह लेनी पड़ी. जैसा कि आप तस्वीरों में देख रहे हैं कि किस तरह पीड़ित परिवारों की  महिलाओं और बच्चो सहित पूरा परिवार स्कूल में पनाह लिए हुए है. गुजरात में हुआ ठीक उसी तर्ज पर हिन्दुओं ने पुलिस की मौजूदगी में इस तरह का दुष्कृत्य किया जिससे मानवता शर्मशार तो हुई ही साथ ही साथ भारतीय लोकतंत्र को भी गहरा आघात पहुंचा था, ठीक वही पिछले शनिवार प्रतापगढ़ में हुआ. बड़े पैमाने पर जो आगज़नी जो क्रुद्ध भीड़ ने मुस्लिम घरो में की उससे देख कर यूपी में सपा सरकार को बहुमत से बनवाने में ठगा सा महसूस कर रहा है मुसलमान क्यूंकि अभी कोसी कलां में भी इसी तर्ज पर मुस्लिम घरो को 
 तबाह व बर्बाद किया गया. मुसलमानों के घर जलाने के पीछे जिस तरह से बल्वाईयों को सपोर्ट और तत्परता में ढीलाई शासन स्तर से की गयी वहशासन तंत्र में गुसपैठ कर चुकी संघी सोच को दर्शाता है.बहाना और आरोप था कि एक हिन्दू लड़की का बलात्कार किया गया और उसे मार डाला गया. जिस व्यक्ति पर आरोप था उसे जानबूझ कर पुलिस ने थाने पर ही रखा जबकि उस पर कारवाई करके जेल भेज देना चाहिए. इस बीच शरारती तत्वों को इस पूरे षड्यंत्र को करने के लिए भरपूर वक़्त मिला और उन्हें शासन द्वारा स्वतंत्रता भी दी गयी. एक दिन के बाद पोस्टमार्टम के बाद लड़की के शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा थानियोजित तरीके से सड़क पर रखा गया था और लगभग 10000 (दस हज़ार) क़ी हिन्दुओंभीड़ ने मुस्लिम बुनकर बहुल गाँव अस्थान में घुस कर हर घर में खूब तबाही मचाई. उन्होंने हर घर को तहस-नहस कर दिया और गैस के सिलेंडरों को घर को उड़ाने में इस्तेमाल किया और औरतों और बच्चों पर ज़ुल्म किया. हिन्दुओं (बल्कि आतंकवादिओं) का तांडव यही नहीं रुका उन्होंने मस्जिद में भी आग लगा दी और यह सब तांडव सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चलता रहा और न तो थाने से न तो शासन स्तर पर कुछ भी कार्यवाही क़ी गयी जबकि थाने के कर्मचारी वहां मौजूद थे. शाम को सादे छ्ह् बजे के बाद पुलिस ने लोगों को बचाने का काम शुरू किया. अस्थान गाँव के लोगों का कहना है कि दंगाईयों में सपा के नेता भी थे. 

इस तरह से एक बार फिर मुसलमान बलि का बकरा बन गया. सबसे हैरानी क़ी बात यह है कि इसी प्रतापगढ़ से 2 कैबिनेट मंत्री राजा राम पाण्डेय  और रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया हैं लेकिन उन दोनों में कोई भी बचाव के लिए नहीं आया. मैं बतात चलूँ कि निर्दलीय राजा भैया को जब सीएम् अखिलेश यादव ने मंत्री मंडल में शामिल किया था तो मीडिया समेत कई मुस्लिम लीडर और खासकर मुस्लिम तबक़ा नाराज़ भी था क्यूंकि सभी राजा भैया क़ी संघी सोच से वाकिफ़ हैं. वैसे अस्थान गाँव में कई बस्तियां है और पिछली बार यहाँ के इतिहास में पहली दफ़ा मुस्लिम प्रधान चुनी गयी जिसका नाम रेशमा पत्नी निजाम अंसारी है. इस बात को लेकर भी कुख्यात राजा भैया खासा नाराज़ थे.
दंगे के बाद जैसा कि होता आया है कि मुआवज़े क़ी घोषणा क़ी गयी लेकिन उन हज़ारों मुसलमानों का क्या होगा जिसका सब कुछ तहस नहस हो गया है. वे तो ज़िन्दगी क़ी उस दहलीज़ पर आ कर खड़े हो गए हैं जहाँ उनके पास कुछ भी नहीं. न घर, न सामान, न कपड़ा और न खाने को अनाज. उन मुस्लिम लोगों के दिलों में इस क़दर हिन्दू दंगाईयों क़ी दहशत तारी हो गयी कि वे एक सप्ताह बाद भी अपने घरो का रुख न कर सके और उसी बरई स्थित मदरसे में पनाह लिए रहे. 

हालाँकि दंगे के बाद मुस्लिम लीडर्स क़ी भूमिका को संतोषजनक कहा जा सकता है. इमाम बुखारी भी अखिलेश यादव से मिले और उचित मुआवज़े क़ी पुरज़ोर मांग क़ी. वहीँ जमीयतुल उलेमा, पसमांदा मुस्लिम समाज सहित के कई मुस्लिम समूहों ने दौरा किया. मुस्लिम समूहों की एकजुटता और 
इन यात्राओं का परिणाम था कि मुख्यमंत्रीअखिलेश यादव अपने तीन मंत्री पारसनाथ यादव,अवदेश प्रसाद, नरेन्द्र वर्मा और विधायक गायत्री प्रजापतिऔर महाराष्ट्र के विधायक अबू असीम आजमी के अलावारामलाल अकेला सहित 50 कारों के काफिले के साथ गांव मेंपहुंचे और अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात क़ी. आखिर में 3.5 लाख रूपये और शष्त्र लाईसेंस और गाँव में एक स्कूल के इतिजाम क़ी मांग क़ी जिसे अखिलेश यादव ने पूरा करने का वादा किया. सपा के फायर ब्रांड नेता आज़म खान ने भी इस मामले में हस्तेक्षेप करते हुए हर परिवार के लिए पका मकान बनवाने क़ी घोषणा क़ी.

लेकिन क्या महज़ मुआवज़े मात्र से यह समस्या ख़त्म हो जाती है. इस घटना और पूर्व क़ी कोसी कलां क़ी घटना को और पूर्व में गुजरात सहित अन्य घटनाओं का गहन अध्ययन करने से कई खतरनाक तथ्य सामने आते हैं जिसमें से प्रमुख रूप से तीन मैं आपको बताता हूँ:::
एक तो प्रशासन स्तर पर संघी सोच वालों क़ी पूर्वाग्रही सोच का विस्तार होना वहीँ दूसरी तरफ जैसा क़ी सुनियोजित तरीके से हर हिन्दू के मन में मुसलमानों के खिलाफ ज़हर बोने का काम बीजेपी और संघी सोच वाले कर रहे है. वस्तुतः दलित हिन्दू हो या सवर्ण सभी के मन में मुस्लिम के प्रति ज़हर भरा जा रहा है तीसरी चीज़ यह है कीदेश भर में बाज़ार, आस्था और देशभक्ति को सिर्फ और सिर्फ हिदुत्व के चश्में से देखने के लिए हर हिन्दू को सिखाया जा रहा है. हालाँकि शुक्र है भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है और अभी भी यहाँ संघी सोच न रखने वालों क़ी संख्या ज़्यादा है और शुक्र है उत्तर प्रदेश में 'मोदी' मानसिकता क़ी सरकार नहीं है.
With thanks 




Sunday, 24 June 2012

आखिर कहा है फसीह मुहम्मद ................?

फसीह मुहम्मद के बारे में पहले मै आपको उनकी निजी ज़िन्दगी से रूबरू करवाता हु 
(Nasreen Wife of Fasih Muhammed)

ग्राम बढ़ा समेला दरभंगा (बिहार) का एक तरक्कीशुदा गाव है इस गाव के नामचीन डाक्टर फ़िरोज़ अहमद साहेब के बेटे फसीह मुहम्मद अपने वालदैन के आँखों का नूर पूरा गाव इनपर और डाक्टर साहेब पर नाज़ करता है डाक्टर साहेब हर एक के सुख दुःख में हमेशा खडे रहते है सिविल इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद फसीह साहेब अपने वालदैन का सपना पूरा करना चाहते थे तभी उनको सउदी अरब के इरम इंजीनियरिंग कार्पोरेतन में नौकरी मिल गई और फसीह साहेब २००७ में चले गए सउदी अरब और वालदैन का सपना पूरा करने लगे 
हर वालदैन की खवाहिश के मुताबिक फसीह साहेब का पूरे धूम धाम से निकाह नसरीन साहिबा के साथ ७ सितम्बर २०११ को हुवा और ये जोड़ा सउदी में ख़ुशी ख़ुशी अपनी ज़िन्दगी बिता रहा था आने वाले तूफ़ान से एकदम अंजन फसीह और नसरीन अपनी ज़िन्दगी बसर कर रहे थे सब ठेक चल रहा था वालदैन इंडिया में खुश थे अपने बच्चे की ख़ुशी को देख कर और कोई भी एक अनजाने तूफ़ान से बाखबर नहीं था जो आकार उनकी ज़िन्दगी तहस नहस करने वाला था 
और आखिर आगया १३ मई २०१२ का इस कुनबे का मनहूस इतवार जिसको ये कुनबा कभी न भूल पायेगा बकौल नसरीन पूरा नज़ारा कुछ इसतरह गुज़ारा की इनके सउदी के अल्जुबली जहा इनका आशियाना था एक फ़ोन आया और फ़ोन करने वाले ने अपने आपको याहू से बोलने वाला बताया घर आने के सबब में बात की थोड़ी देर में वह २ इंडियन पुलिस वालो को साथ लेकर सउदी की पुलिस पहुची और इनके शौहर जनाब फसीह मुहम्मद को कुछ जानकारी लेने को कहकर घर से ले गई नसरीन इस नज़रे से एकदम सन्न थी ये सउदी के दोपहर लहभग एक बजे का वाक्य था आसपास अजनबी मुल्क और शहर के लोगो सिर्फ तस्सल्ली दे सकते थे जो वो दे रहे थे सारा दिन गुज़र गया फिर रात आए इंडिया में वालदैन भी परेशां थे रात को १२ बजे के बाद एक अनजाने नंबर से फ़ोन आया उधर से आवाज़ फसीह साहेब की थी ये वो आखरी आवाज़ थी फसीह साहेब की जो नसरीन ने सुनी फसीह साहेब रोकर कह रहे थे मैने कुछ किया नहीं है फिर भी ये लोग मुझे इंडिया ले जारहे है अभी नसरीन कुछ और पूछती इससे पहले ही फ़ोन कट गया नसरीन पागलो की तरह उस नंबर पर फ़ोन करती रही मगर फ़ोन बंद था लगातार
सुबह हुई नसरीन मुहल्ले के कुछ लोगो के साथ पुलिस के पास गयी वह से पता चला की फसीह साहेब को इंडियन पुलिस लेकर रात को ही इंडिया चली गए है नसरीन ने ये खबर अपने ससुराल और मैके में बताई और यहाँ लोग इदर उधर हाथ पर मरने लगे मगर सब बेमतलब था 
आखिर १५ मई को नसरीन सउदी से इंडिया आगई और अपने ससुराल वालो के साथ दिल्ली के हर दफ्तर का चक्कर कटने लगी मगर कोई ये बताने वाला नहीं मिला की आखिर फसीह है कहा और किस जुर्म में उसकी गिरफ़्तारी हुई है अब थक हार कर उन्होने न्यायलय की शरण ली है और माननीय न्यायालय ने इसका संज्ञान लिया है
ये बढ़ समेला (दरभंगा) जो मुसलमानों की आबादी वाला पढ़ा लिखा और आबाद खुश हाल गाव है का पहला वाक्य नहीं है इससे पहले २०११ में कर्नाटक पुलिस उस गाव से एक ऐसे लडके को पकड़ कर आतंकवादी बता कर ले गयी थी जो कभी गाव से बहार गया ही नहीं था कर्नाटक जाना बहुत दूर की बात है कई दिनों बाद नितीश कुमार ने इस मसले पर अपना विरोध कर्नाटक सरकार को दिखाया था जिससे कर्नाटका सरकार ने उसको कोर्ट में हाज़िर किया था 
ऐसा कानून है की गिरफ़्तारी के २४ घंटे के अन्दर अन्दर पुलिस को मुजरिम को अदालत में पेश करना होता है फिर किस कानून के तहत फसीह मुहम्मद को आज तक कही पेश नहीं किया गया आखिर कौन थे पुलिस वाले जिन्होने गिरफ़्तारी की थी आखिर कहा गए फसीह मुहम्मद उनको ज़मीन खा गयी या आस्मां निगल गया आखिर क्यों चुप है देश के आला नेता आखिर कहा है फसीह मुहम्मद 

इस्लाम का वरण स्वेच्छा से - रामधारी सिंह दिनकर




रामधारी सिंह दिनकर (प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार)

जब इस्लाम आया, उसे देश में फैलने से देर नहीं लगी। तलवार के भय अथवा पद के लोभ से तो बहुत थोड़े ही लोग मुसलमान हुए, ज़्यादा तो ऐसे ही थे जिन्होंने इस्लाम का वरण स्वेच्छा से किया। बंगाल, कश्मीर और पंजाब में गाँव-के-गाँव एक साथ मुसलमान बनाने के लिए किसी ख़ास आयोजन की आवश्यकता नहीं हुई। ...मुहम्मद (सल्लल्लाहो ताअला अलैहि व आलिही वसल्लम) साहब ने जिस धर्म का उपदेश दिया वह अत्यंत सरल और सबके लिए सुलभ धर्म था। अतएव जनता उसकी ओर उत्साह से बढ़ी। ख़ास करके, आरंभ से ही उन्होंने इस बात पर काफ़ी ज़ोर दिया कि इस्लाम में दीक्षित हो जाने के बाद, आदमी आदमी के बीच कोई भेद नहीं रह जाता है। इस बराबरी वाले सिद्धांत के कारण इस्लाम की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई और जिस समाज में निम्न स्तर के लोग उच्च स्तर वालों के धार्मिक या सामाजिक अत्याचार से पीड़ित थे उस समाज के निम्न स्तर के लोगों के बीच यह धर्म आसानी से फैल गया...।
‘‘...सबसे पहले इस्लाम का प्रचार नगरों में आरंभ हुआ क्योंकि विजेयता, मुख्यतः नगरों में ही रहते थे...अन्त्यज और निचली जाति के लोगों पर नगरों में सबसे अधिक अत्याचार था। ये लोग प्रायः नगर के भीतर बसने नहीं दिए जाते थे...इस्लाम ने जब उदार आलिंगन के लिए अपनी बाँहें इन अन्त्यजों और ब्राह्मण-पीड़ित जातियों की ओर पढ़ाईं, ये जातियाँ प्रसन्नता से मुसलमान हो गईं।
कश्मीर और बंगाल में तो लोग झुंड-के-झुंड मुसलमान हुए। इन्हें किसी ने लाठी से हाँक कर इस्लाम के घेरे में नहीं पहुँचाया, प्रत्युत, ये पहले से ही ब्राह्मण धर्म से चिढ़े हुए थे...जब इस्लाम आया...इन्हें लगा जैसे यह इस्लाम ही उनका अपना धर्म हो। अरब और ईरान के मुसलमान तो यहाँ बहुत कम आए थे। सैकड़े-पच्चानवे तो वे ही लोग हैं जिनके बाप-दादा हिन्दू थे...।
‘‘जिस इस्लाम का प्रवर्त्तन हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो ताअला अलैहि व आलिही वसल्लम) साहब ने किया था...वह धर्म, सचमुच, स्वच्छ धर्म था और उसके अनुयायी सच्चरित्र, दयालु, उदार, ईमानदार थे। उन्होंने मानवता को एक नया संदेश दिया, गिरते हुए लोगों को ऊँचा उठाया और पहले-पहल दुनिया में यह दृष्टांत उपस्थित किया कि धर्म के अन्दर रहने वाले सभी आपस में समान हैं। उन दिनों इस्लाम ने जो लड़ाइयाँ लड़ीं उनकी विवरण भी मनुष्य के चरित्रा को ऊँचा उठाने वाला है।’’

—‘संस्कृति के चार अध्याय’
लोक भारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1994
पृष्ठ-262, 278, 284, 326, 317

Friday, 18 May 2012

मुसलमानों को बदनाम करते इतिहासकार

भारत में मुस्लिम हुक्मरानों की छवि को जितना बिगाड़ा गया है उतना शायद अंग्रेजों को भी नही.. अक्सर कहा जाता है की मुस्लिम शासकों ने भारतीय जनता पर ज़ुल्म के पहाड़ तोड़े ..हिन्दू अतिवादी संगठन तो बा काएदा एक चलाकर तस्वीर छापकर मीडिया का सहारा लेकर तमाम मुस्लिम शासकों को महा ज़ालिम खूंख्वार साबित करने की कोशिश करते हैं..ओरन्ग्ज़ेब जेसे नेक शासक को इसका सबसे ज्यादा शिकार बनाया गया..ये आज तक मेरी समझ में नही आया की जो इन्सान राजकोष से एक पैसा भी अपने खर्च के लिए नही लेता टोपी सीकर और कुरान लिख कर अपना और अपनी पत्नी का रिजक हासिल करता हो, तक्वा और अल्लाह का डर उसके दिल में..इतना था की वो मैदाने जंग में भी नमाज़ नही छोड़ता था..ऐसा हाकिम केसे छोटे बच्चों को दिवार में चिनवा सकता है. और तो और जलते तेल में डालना और न जाने क्या क्या .. अगर आज हिंदुस्तान को ओरंगजेब जेसा शासक मिल जाए ..तो किया आज के चोर नेता उससे नज़र मिला सकते हैं..

दूसरी बात ये के अगर मुस्लिम शासकों ने तलवार के जोर पर धर्म परिवर्तन कराया तो ..ये राजपूत जो अपने धर्म ,देश पर मर मिटने के लिए जाने जाते हैं. बहादुर होते थे और हैं भी..ये केसे तलवार के बल पर मुस्लमान हो गए ..आज मुसलमनो में बहुत से राजपूत मोजूद हैं..तलवार के बल पर तो लड़ने मरने मे कमज़ोर मानी जाने वाली जातियां जेसे पंडित और बनिया सबसे पहले मुस्लमान होनी चाहिए थीं ..मगर ऐसा नही है..एक और बात सती, नगा साधुओं का नंगा नाच ये सब इस्लाम में बहुत बुरा माना जाता है इन सबको मुस्लिम शासकों की तलवार क्यों ख़त्म नही केर सकी..क्योंकि मुस्लिम शासकों ने कभी हिन्दू धर्म से कोई छेड़छाड़ नही की..झूट के पुलिंदे तो बहुत सरे बंधे जा सकते हैं पर जब भी निष्पक्ष होकर सोचने बैठोगे तो सच कुछ और ही सामने आता है.. आप सोमनाथ मंदिर का इतिहास उठाकर देख लीजिये वहां होन वाले अत्याचार को खत्म करने के मुस्लिम शासको के प्रशंसनीय प्रयास को देख लीजिये .................
मगर स्थिति यह है की तुगलक जो अपने समय से 100 साल आगे की सोचता था को एक तानाशाह और सनकी बादशाह करार दिया गया और वही ठंडे दिमाग से उसके चलायेगाये नियमो को देखे तो यह अपने यूग की सोच रखने वाला शासक कहलायेगा ।