Sunday, 24 June 2012

आखिर कहा है फसीह मुहम्मद ................?

फसीह मुहम्मद के बारे में पहले मै आपको उनकी निजी ज़िन्दगी से रूबरू करवाता हु 
(Nasreen Wife of Fasih Muhammed)

ग्राम बढ़ा समेला दरभंगा (बिहार) का एक तरक्कीशुदा गाव है इस गाव के नामचीन डाक्टर फ़िरोज़ अहमद साहेब के बेटे फसीह मुहम्मद अपने वालदैन के आँखों का नूर पूरा गाव इनपर और डाक्टर साहेब पर नाज़ करता है डाक्टर साहेब हर एक के सुख दुःख में हमेशा खडे रहते है सिविल इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद फसीह साहेब अपने वालदैन का सपना पूरा करना चाहते थे तभी उनको सउदी अरब के इरम इंजीनियरिंग कार्पोरेतन में नौकरी मिल गई और फसीह साहेब २००७ में चले गए सउदी अरब और वालदैन का सपना पूरा करने लगे 
हर वालदैन की खवाहिश के मुताबिक फसीह साहेब का पूरे धूम धाम से निकाह नसरीन साहिबा के साथ ७ सितम्बर २०११ को हुवा और ये जोड़ा सउदी में ख़ुशी ख़ुशी अपनी ज़िन्दगी बिता रहा था आने वाले तूफ़ान से एकदम अंजन फसीह और नसरीन अपनी ज़िन्दगी बसर कर रहे थे सब ठेक चल रहा था वालदैन इंडिया में खुश थे अपने बच्चे की ख़ुशी को देख कर और कोई भी एक अनजाने तूफ़ान से बाखबर नहीं था जो आकार उनकी ज़िन्दगी तहस नहस करने वाला था 
और आखिर आगया १३ मई २०१२ का इस कुनबे का मनहूस इतवार जिसको ये कुनबा कभी न भूल पायेगा बकौल नसरीन पूरा नज़ारा कुछ इसतरह गुज़ारा की इनके सउदी के अल्जुबली जहा इनका आशियाना था एक फ़ोन आया और फ़ोन करने वाले ने अपने आपको याहू से बोलने वाला बताया घर आने के सबब में बात की थोड़ी देर में वह २ इंडियन पुलिस वालो को साथ लेकर सउदी की पुलिस पहुची और इनके शौहर जनाब फसीह मुहम्मद को कुछ जानकारी लेने को कहकर घर से ले गई नसरीन इस नज़रे से एकदम सन्न थी ये सउदी के दोपहर लहभग एक बजे का वाक्य था आसपास अजनबी मुल्क और शहर के लोगो सिर्फ तस्सल्ली दे सकते थे जो वो दे रहे थे सारा दिन गुज़र गया फिर रात आए इंडिया में वालदैन भी परेशां थे रात को १२ बजे के बाद एक अनजाने नंबर से फ़ोन आया उधर से आवाज़ फसीह साहेब की थी ये वो आखरी आवाज़ थी फसीह साहेब की जो नसरीन ने सुनी फसीह साहेब रोकर कह रहे थे मैने कुछ किया नहीं है फिर भी ये लोग मुझे इंडिया ले जारहे है अभी नसरीन कुछ और पूछती इससे पहले ही फ़ोन कट गया नसरीन पागलो की तरह उस नंबर पर फ़ोन करती रही मगर फ़ोन बंद था लगातार
सुबह हुई नसरीन मुहल्ले के कुछ लोगो के साथ पुलिस के पास गयी वह से पता चला की फसीह साहेब को इंडियन पुलिस लेकर रात को ही इंडिया चली गए है नसरीन ने ये खबर अपने ससुराल और मैके में बताई और यहाँ लोग इदर उधर हाथ पर मरने लगे मगर सब बेमतलब था 
आखिर १५ मई को नसरीन सउदी से इंडिया आगई और अपने ससुराल वालो के साथ दिल्ली के हर दफ्तर का चक्कर कटने लगी मगर कोई ये बताने वाला नहीं मिला की आखिर फसीह है कहा और किस जुर्म में उसकी गिरफ़्तारी हुई है अब थक हार कर उन्होने न्यायलय की शरण ली है और माननीय न्यायालय ने इसका संज्ञान लिया है
ये बढ़ समेला (दरभंगा) जो मुसलमानों की आबादी वाला पढ़ा लिखा और आबाद खुश हाल गाव है का पहला वाक्य नहीं है इससे पहले २०११ में कर्नाटक पुलिस उस गाव से एक ऐसे लडके को पकड़ कर आतंकवादी बता कर ले गयी थी जो कभी गाव से बहार गया ही नहीं था कर्नाटक जाना बहुत दूर की बात है कई दिनों बाद नितीश कुमार ने इस मसले पर अपना विरोध कर्नाटक सरकार को दिखाया था जिससे कर्नाटका सरकार ने उसको कोर्ट में हाज़िर किया था 
ऐसा कानून है की गिरफ़्तारी के २४ घंटे के अन्दर अन्दर पुलिस को मुजरिम को अदालत में पेश करना होता है फिर किस कानून के तहत फसीह मुहम्मद को आज तक कही पेश नहीं किया गया आखिर कौन थे पुलिस वाले जिन्होने गिरफ़्तारी की थी आखिर कहा गए फसीह मुहम्मद उनको ज़मीन खा गयी या आस्मां निगल गया आखिर क्यों चुप है देश के आला नेता आखिर कहा है फसीह मुहम्मद 

इस्लाम का वरण स्वेच्छा से - रामधारी सिंह दिनकर




रामधारी सिंह दिनकर (प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार)

जब इस्लाम आया, उसे देश में फैलने से देर नहीं लगी। तलवार के भय अथवा पद के लोभ से तो बहुत थोड़े ही लोग मुसलमान हुए, ज़्यादा तो ऐसे ही थे जिन्होंने इस्लाम का वरण स्वेच्छा से किया। बंगाल, कश्मीर और पंजाब में गाँव-के-गाँव एक साथ मुसलमान बनाने के लिए किसी ख़ास आयोजन की आवश्यकता नहीं हुई। ...मुहम्मद (सल्लल्लाहो ताअला अलैहि व आलिही वसल्लम) साहब ने जिस धर्म का उपदेश दिया वह अत्यंत सरल और सबके लिए सुलभ धर्म था। अतएव जनता उसकी ओर उत्साह से बढ़ी। ख़ास करके, आरंभ से ही उन्होंने इस बात पर काफ़ी ज़ोर दिया कि इस्लाम में दीक्षित हो जाने के बाद, आदमी आदमी के बीच कोई भेद नहीं रह जाता है। इस बराबरी वाले सिद्धांत के कारण इस्लाम की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई और जिस समाज में निम्न स्तर के लोग उच्च स्तर वालों के धार्मिक या सामाजिक अत्याचार से पीड़ित थे उस समाज के निम्न स्तर के लोगों के बीच यह धर्म आसानी से फैल गया...।
‘‘...सबसे पहले इस्लाम का प्रचार नगरों में आरंभ हुआ क्योंकि विजेयता, मुख्यतः नगरों में ही रहते थे...अन्त्यज और निचली जाति के लोगों पर नगरों में सबसे अधिक अत्याचार था। ये लोग प्रायः नगर के भीतर बसने नहीं दिए जाते थे...इस्लाम ने जब उदार आलिंगन के लिए अपनी बाँहें इन अन्त्यजों और ब्राह्मण-पीड़ित जातियों की ओर पढ़ाईं, ये जातियाँ प्रसन्नता से मुसलमान हो गईं।
कश्मीर और बंगाल में तो लोग झुंड-के-झुंड मुसलमान हुए। इन्हें किसी ने लाठी से हाँक कर इस्लाम के घेरे में नहीं पहुँचाया, प्रत्युत, ये पहले से ही ब्राह्मण धर्म से चिढ़े हुए थे...जब इस्लाम आया...इन्हें लगा जैसे यह इस्लाम ही उनका अपना धर्म हो। अरब और ईरान के मुसलमान तो यहाँ बहुत कम आए थे। सैकड़े-पच्चानवे तो वे ही लोग हैं जिनके बाप-दादा हिन्दू थे...।
‘‘जिस इस्लाम का प्रवर्त्तन हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो ताअला अलैहि व आलिही वसल्लम) साहब ने किया था...वह धर्म, सचमुच, स्वच्छ धर्म था और उसके अनुयायी सच्चरित्र, दयालु, उदार, ईमानदार थे। उन्होंने मानवता को एक नया संदेश दिया, गिरते हुए लोगों को ऊँचा उठाया और पहले-पहल दुनिया में यह दृष्टांत उपस्थित किया कि धर्म के अन्दर रहने वाले सभी आपस में समान हैं। उन दिनों इस्लाम ने जो लड़ाइयाँ लड़ीं उनकी विवरण भी मनुष्य के चरित्रा को ऊँचा उठाने वाला है।’’

—‘संस्कृति के चार अध्याय’
लोक भारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 1994
पृष्ठ-262, 278, 284, 326, 317

Friday, 18 May 2012

मुसलमानों को बदनाम करते इतिहासकार

भारत में मुस्लिम हुक्मरानों की छवि को जितना बिगाड़ा गया है उतना शायद अंग्रेजों को भी नही.. अक्सर कहा जाता है की मुस्लिम शासकों ने भारतीय जनता पर ज़ुल्म के पहाड़ तोड़े ..हिन्दू अतिवादी संगठन तो बा काएदा एक चलाकर तस्वीर छापकर मीडिया का सहारा लेकर तमाम मुस्लिम शासकों को महा ज़ालिम खूंख्वार साबित करने की कोशिश करते हैं..ओरन्ग्ज़ेब जेसे नेक शासक को इसका सबसे ज्यादा शिकार बनाया गया..ये आज तक मेरी समझ में नही आया की जो इन्सान राजकोष से एक पैसा भी अपने खर्च के लिए नही लेता टोपी सीकर और कुरान लिख कर अपना और अपनी पत्नी का रिजक हासिल करता हो, तक्वा और अल्लाह का डर उसके दिल में..इतना था की वो मैदाने जंग में भी नमाज़ नही छोड़ता था..ऐसा हाकिम केसे छोटे बच्चों को दिवार में चिनवा सकता है. और तो और जलते तेल में डालना और न जाने क्या क्या .. अगर आज हिंदुस्तान को ओरंगजेब जेसा शासक मिल जाए ..तो किया आज के चोर नेता उससे नज़र मिला सकते हैं..

दूसरी बात ये के अगर मुस्लिम शासकों ने तलवार के जोर पर धर्म परिवर्तन कराया तो ..ये राजपूत जो अपने धर्म ,देश पर मर मिटने के लिए जाने जाते हैं. बहादुर होते थे और हैं भी..ये केसे तलवार के बल पर मुस्लमान हो गए ..आज मुसलमनो में बहुत से राजपूत मोजूद हैं..तलवार के बल पर तो लड़ने मरने मे कमज़ोर मानी जाने वाली जातियां जेसे पंडित और बनिया सबसे पहले मुस्लमान होनी चाहिए थीं ..मगर ऐसा नही है..एक और बात सती, नगा साधुओं का नंगा नाच ये सब इस्लाम में बहुत बुरा माना जाता है इन सबको मुस्लिम शासकों की तलवार क्यों ख़त्म नही केर सकी..क्योंकि मुस्लिम शासकों ने कभी हिन्दू धर्म से कोई छेड़छाड़ नही की..झूट के पुलिंदे तो बहुत सरे बंधे जा सकते हैं पर जब भी निष्पक्ष होकर सोचने बैठोगे तो सच कुछ और ही सामने आता है.. आप सोमनाथ मंदिर का इतिहास उठाकर देख लीजिये वहां होन वाले अत्याचार को खत्म करने के मुस्लिम शासको के प्रशंसनीय प्रयास को देख लीजिये .................
मगर स्थिति यह है की तुगलक जो अपने समय से 100 साल आगे की सोचता था को एक तानाशाह और सनकी बादशाह करार दिया गया और वही ठंडे दिमाग से उसके चलायेगाये नियमो को देखे तो यह अपने यूग की सोच रखने वाला शासक कहलायेगा ।

Sunday, 22 April 2012

बलात्कारी अमेरिका

अमरीका में एक अध्ययन में पता चला है कि वहाँ लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं के साथ उनकी ज़िंदग़ी में कभी न कभी बलात्कार हुआ या उसकी कोशिश की गई.सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के अनुसार इससे भी ज़्यादा 25 प्रतिशत महिलाओं पर उनके पति या पार्टनर ने हमला किया.राष्ट्रीय स्तर पर हुए इस अध्ययन के तहत ये देखा गया है कि पुरुषों या महिलाओं को अपने जीवनसाथी की ओर से किस तरह की यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है.रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर एक करोड़ 20 लाख मामले दर्ज हुए जिनके मुताबिक़ हर मिनट बलात्कार, हिंसा या छेड़छाड़ के 24 मामले रहे.
सेंटर के विशेषज्ञों ने इस सर्वेक्षण के नतीजे चौंकाने वाले बताए हैं.सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार:
सर्वे से पहले के 12 महीनों में 10 लाख से ज़्यादा महिलाओं ने बलात्कार की शिकायत दर्ज की 60 लाख से ज़्यादा महिलाओं और पुरुषों का पीछा किया गया लगभग सवा करोड़ महिलाओं और पुरुषों ने एक साल में अपने जीवन साथी की ओर से बलात्कार, शारीरिक हिंसा और छेड़छाड़ की शिकायत की

जीवन पर असर

सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के नेशनल सेंटर फ़ॉर इंजरी प्रिवेंशन ऐंड कंट्रोल की निदेशक डॉक्टर लिंडा डेगुटिस ने कहा, "जो लोग अपने जीवन साथी की ओर से यौन हिंसा या अन्य हिंसा का शिकार होते हैं उनके जीवन पर उसका गहरा असर रहता है."

बलात्कार या यौन हिंसा का शिकार अधिकतर लोगों के साथ ऐसा उनके जीवन के शुरुआती वर्षों में होता है. बलात्कार पीड़ितों में से 80 प्रतिशत ने बताया कि उनके साथ ऐसा 25 साल की उम्र से पहले ही हो गया था.डॉक्टर डेगुटिस के अनुसार 35 प्रतिशत महिलाएँ ऐसी थीं जिनका 18 साल की उम्र से पहले ही बलात्कार हो गया था और फिर वयस्क होने पर भी उन्हें वो सब सहना पड़ा.अध्ययन से पता चलता है कि इन घटनाओं का शिकार लोगों में अपनी सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंता हो जाती है और वे तनावग्रस्त भी हो जाते हैं.बलात्कार या हिंसा का शिकार महिलाओं में दमा, डायबिटीज़, अक़सर सिर में दर्द रहना, तेज़ दर्द या सोने में मुश्किल जैसी बीमारियाँ हो जाती हैं.पुरुषों पर हमले के भी मामले दर्ज किए गए हैं और पाया गया है कि बलात्कार या यौन हिंसा का शिकार होने वाले पुरुषों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है.अध्ययन के अनुसार हर सातवाँ पुरुष बलात्कार का शिकार हुआ है या कभी न कभी उसके साथ बलात्कार की कोशिश हुई है.जिन पुरुषों के साथ उनके जीवन साथियों ने बलात्कार किया उनमें से 53 प्रतिशत के साथ ऐसा 25 साल की उम्र से पहले हुआ.इसके अलावा पीड़ित पुरुषों में से 25 प्रतिशत के साथ ऐसा 10 साल या उससे कम उम्र में ही हो गया था.

Sunday, 8 April 2012

दुनिया का सबसे नापसंदीदा कुत्ता मोदी


times  पत्रिका की ओर से चुने गए दुनिया की सौ प्रभावशाली हस्तियों के टॉप 15 में एशिया के ४ लोग 


है राजनेतिक कुत्ता  नरेंद्र मोदीके साथ इमरान खान, आग सान सू की तथा अशर बशद ने जगह बनाई 


है। मोदी नापसंदी के भी महारथी निकला जिसे  नापसंद करने वालों ने अधिक वोट दिया। सूची में 


बराक ओबामा, अन्ना हजारे, नीतीश कुमार, सचिन तेंदुलकर, हिलेरी क्लिंटन मोदी से पिछड़ गए। 


मोदी सौ पसंदीदा हस्तियों की सूची में तीसरे स्थान पर और नापसंदगी की सूची में प्रथम स्थान पर 


रहे। एक हैकर ग्रुप एनोनिमस को पहला स्थान मिला।प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तथा काग्रेस 


अध्यक्ष सोनिया गाधी क्रमश: वर्ष 2010 तथा 2011 में टाइम के सौ प्रभावशाली लोगों की सूची में 


स्थान पा चुके हैं जबकि वर्ष 2012 के लिए चुने गए एक सौ हस्तियों की सूची में गुजरात के मुख्यमंत्री 


नरेंद्र मोदी आखिरी समय में पिछड़कर तीसरे स्थान पर आ गए। मोदी को पसंद करने वालों ने 2 लाख 


56 हजार 792 वोट दिए जबकि नापसंद करने वालों ने 2 लाख 66 हजार 684 मत दिए। उधर सीरिया 


में विरोध का सामना कर रहे राष्ट्रपति बशर अशद को भी पसंद करने वालों ने 91 हजार 632 जबकि 


नापसंद करने वालों ने 98 हजार 387 मत दिए।पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर एवं तहरीक ए इंसाफ पार्टी 


के मुखिया इमरान खान ने शुरुआत से आखिर तक 5वा स्थान बरकरार रखा। पाकिस्तान में उनकी 


बढ़ती लोकप्रियता के मुताबिक उन्हें एक लाख 16 हजार 130 मत मिले जबकि 25 हजार 447 ने उन्हें 


भी नापसंद किया। म्यामार में हाल ही में चुनाव जीतने वाले नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता 


आग सान सूकी इस सूची में 14वें क्रमाक पर रहीं, उन्हें 45 हजार 688 लोगों ने पसंद किया जबकि 


2625 ने नापसंदगी का मत दिया। द 2012 टाइम 100 पोल नामक ऑनलाइन मतदान में अमेरिकी 


राष्ट्रपति बराक ओबामा महज 25 हजार 373 मतों के साथ 21 वें स्थान पर रहे जबकि वर्ष 2010 की 


सूची में वे चौथे क्रमाक पर रहे थे, इसी सूची में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 19वें क्रमाक पर चुने गए 


थे। जबकि वर्ष 2011 में काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी इस सूची के 91वें क्रम पर रही थीं।प्रधानमंत्री 


पद की दावेदारी में मोदी के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 45 वें नंबर 


पर रहे जिन्हें 13 हजार 400 मत मिले जबकि भारत में भ्रष्टाचार विरोधी अगस्त क्राति के नायक 


अन्ना हजारे 23 हजार 977 मतों के साथ 22वें स्थान पर रहे। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन 


ग्यारवें क्रमाक पर रहे जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के प्रमुख दावेदार रोन पॉल 


को 12वें नंबर पर ही संतोष करना पड़ा। इनके अलावा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर लियोनेल मेसी 


दसवें, पॉप गायिका लेडी गागा 18वें, शकीरा 19वें, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर 25वें, अमेरिकी विदेश 


मंत्री हिलेरी क्लिंटन तीसवें, मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक 158वें, रानी एलिजाबेथ द्वितीय 75वें, 


अभिनेता सलमान खान 66वें तथा ऊलाला गर्ल विद्या बालन 33वें स्थान पर रहीं।टाइम के ऑनलाइन 


पॉल के अंतिम 48 घटे तक मुख्यमंत्री मोदी पहले पायदान पर आ गए थे लेकिन आखिरी चौबीस घटे 


में उनके खिलाफ करीब डेढ लाख वोट पड़े। जबकि दूसरे स्थान पर रहे उद्यमी एरिक मार्टिन को भी 


आखिरी 24 घटे में भारी मत मिले। टाइम की सूची में ट्रेंड के मुताबिक हैकर ग्रुप संचालित एक 


गुमनाम चरित्र एनोनिमस ने भी अपने नाम की ही तरह आखिरी समय में जबरदस्त 3 लाख 95 


हजार 793 वोट बटोरकर पहले नंबर पर आ गया।

नीलम खान -- पूर्वांचल की IRON लेडी के साथ कांग्रेस का धोखा

नीलम खान का पहले मै आप सबको परिचय करवा देता हु ये है कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनारस की जन्मी नीलम खान की शादी कांग्रेस के एक जुझारू मुस्लिम नेता नुसरत खान के साथ हुई एक सीढ़ी सधी घरेलू महिला ने अपनी शादी के बाद गरेलू जीवन हसी ख़ुशी बिताना शुरू किया तीन छोटे छोटे बच्चे और पति ये थी उसकी पूरी दुनिया उसको क्या पता था की उसके पति की मुस्लिमो की हमदर्दी उसके लिए मुसीबते लेकर आरही है बात उन्दिनो की है जब मुसलमानों को 1997 में छात्रवृत्ति के नाम का ढकोसला शुरू हुवा था इसको ढकोसला कहना सही होगा क्योकि उस वक्त बनारस के मुस्लमान लडको से उनके कागज़ात जमा करवा लिया जाता था और पैसा उस वक्त के एक मंत्री के जेब में जाता था । नुसरत साहेब काफी जुझारू नेता थे फिर क्या उन्हों ने उठा लिया बीड़ा इन्साफ दिलवाने का और लग गए इन्साफ की लड़ाई में दिन था १३ जनवरी १९९९ की दोपहर १० बजे का समय था उस वक्त के शिक्षा मंत्री वीरेंदरसिंह अपने घर पर मौजूद थे बनारस में नुसरत साहेब ने उनके घर के आगे मंत्री जी से प्रोटेस्ट किया मंत्री जी के सामने आत्मदाह की कोशिश की और बेचारे अल्लाह को प्यारे हो गए उनकी फाइल मंत्री जी ने धुल खाने को भेज दी थाने में और उसपर आजतक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई । और यही से शुरू हुवा नीलम खान की मुफलिसी का दौर
तीन छोटे छोटे यतीम बच्चे और भूख ।
इत्तिफाक से मै भी उनके पड़ोस में रहता हु सारे मुहल्ले के बुजुर्गो ने मिलकर एक मीटिंग की और नीलम खान को सभासदी का चुनाव लड़वाने का फैसला किया गया वो घरेलु औरत चुनाव लड़ी और उसकी जीत हुई जीत भी ऐसी की सबकी ज़मानत ज़ब्त हो गयी यहाँ से उसका राजनीतिक सफ़र शुरू हुवा समाज सेवा का जज्बा दिल में रख कर समाज सेवा शुरू की और जल्दी ही शहर में उनकी पहचान बन गयी । सन २०१२ के विधान सभा चुनाव में अपनी उम्मेदवारी उन्होने पेश की जो सबसे बेहतर उम्मेदवार भी थी ये वह के पुरवा सांसद राजेश मिश्र को पसंद नहीं आया की वो इतना ऊपर कैसे बढ़ सकती है और उनको दर सताने लगा की अगर उसको टिकट मिला तो वो जीत जाइगी और कही ऐसा न हो की विधायक बनने के बाद अपने पति की फाइल को दुबारा खुलवा ले और उसमे उनके दोस्त वो पुरवा मंत्री फंस न जाये ।
यही सोच लेकर उन्होने टिकट दिया (या दिलवाया) दयालु मिश्र को (जिनके पैंट के नीचे भगवा चड्ढी है ) ये मिश्र जी RSS के पुराने कार्यकर्ता रहे है । उस विधान सभा में ६३% वोट मुसलमानों का होने के बाद भी एक ऐसे आदमी को टिकट दिया गया जो भगवा चड्ढी धरी था जिसपर नीलम ने प्रोटेस्ट किया जिसमे बडे नेताओ  ने कहा की आपको उतरी से टिकट देता हु जिसके लिए राजेश मिश्र ने हा भी किया मगर मिश्र जी दिल के कमज़ोर इंसान है वो अगये बसपा से की एक नेता क हुस्न के चक्कर में और उनको बसपा से बुलाकर कांग्रेस का टिकट दिया फिर क्या था दोनों सीटे जीती भाजपा ने क्योकि राजेश मिश्र जी उसको ही जिताना चाहते थे और  मुसलमानों को मुह की खानी पड़ी 
तो ये है कांग्रेस में मुसलमानों की औकात फिर भी ३८% रायबरेली में हमारी जम्हूरियत के बाद लोग राहुल गाँधी को जीतते है और राहुल बाबा मुह उठा कर कहते है की अगर कोई मिला इस काबिल तो मुस्लमान भी प्रधान मंत्री बनेगा मै कहना चाहता हु राहुल जी नज़र उठाओ एक नहीं एक हज़ार मिल जाएगी ।सबको छोडो ३ महिना और मै खुद देश से आतकवाद और गरीबी दूर कर दूंगा ।
मगर आपको कोई नहीं दिखेगा राहुल जी क्योकि आपकी आँखों पर भी धर्म का चश्मा चढ़ा है और आपकी पैंट के नीचे भी भगवा चड्ढी है । इस बार लोकसभा चुनाव में आपको कला झंडा दिखाने के साथ ही मै दावा करता हु की वहा क मुसलमानों को एक करूँगा की आप हार का मुह देख ले ।

Wednesday, 7 March 2012

फिर न एक हो सके मुसलमान

हम लोगो यानि मैने आफताब फाजिल सोहराब अली नसीम निगार हिंद रफीक देलही रफीक चुरिमियां जाबिर भाई वगैरह ने काफी मेहनत की किसी ने २ तो किसी ने ३-४ साल लगातार मेहनत की कि मुसलमानों को उनका हक़ मिले हमे सियासत के गलियारे में दाखिला मिले इन नामो में अगर मैने अगर अनवर चौहान का नाम न लिया तो थोडा बैमानी होगी भले ही मेरी उनसे वसूलो के बातो पर पटरी न खपाई मगर मेहनत उन्होने भी कि कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को उनका हक़ dilwatey है नतीजा क्या आया देखते है
बहुजन समाज पार्टी के पैसो से कड़ी पार्टी पीस पार्टी ने कुछ सीते निकली और थोडा हनक दिखाने कि अभी कोशिश कि थी कि धोती के अन्दर भगवा चड्ढी पहने मुलायम नाम के मक्कार को पूरा बहुमत हम मुसलमान थाली में सजा कर दे चुके थे वरना जितना डाक्टर अय्यूब को मई जनता हु वो इंसान ज़रूर सौदा करता और कोई हनक वाला ओहदा पता मगर हम मुस्लमान................. सिर्फ मुह्ज़ोरिया करते है
थोड़ी कामयाबी सिर्फ एक साल से बनी पार्टी कौमी एकता दल के मुख़्तार अंसारी के खाते में आई जिन्हों ने २ सीट जीती और ३ सीटो पर बढ़िया टक्कर दी अगर मुस्लमान साथ देता तो ये ५ हो जाती अब देखते है बाकि कि पार्टियों का रंग जो मुसलमानों के नाम पर लड़ी
ओलिमा कौंसिल  मौलाना आमिर रशदी उम्दा इंसान है बस थोडा जज्बाती है और अकाल जब बात रही थी तो सबसे आगे खडे थे इस लिए फरिश्तो ने चुटकी से अकाल दी जिसमे इनकी कोई गलती नहीं है बेचारे के पास जो है भी वो hamesha गलत जगह इस्तिमाल हो जाती है चाहे वो रशीद के कतला में इनकी गवाही हो या फिर एक करोड़ कि माला पहनने कि बात या फिर स्वामी को गले लगाने कि बात वरना ये लगभग ५-८ सीट ज़रूर जीतते मगर जितना चाहेंगे तब न ये तो सिर्फ चुनाव को लड़ना चाहे थे लड़ गई अपने घर तक में हार बैठे 
आंबेडकर समाज पार्टी :-  भाई तेज सिंह को हो सकता है मेरी बात बुरी लगे मगर भाई सच यही है कि हमारी कौम ने साथ दिया या नहीं दिया आपका मगर आपके अपने लोगो ने आपका साथ नहीं दिया है charkhari में आपका चुनाव लडने का फैसला वाकई काबिल-इ-तारीफ कदम था मगर लड़ाई कि तरह लड़ाई आप नहीं लड़ सके वरना आपके karyakarta हम लोगो से sampark करते और जब मैने आपके २ लोगो को मुख़्तार भाई से मिलवाया था तो फिर वो गटबंधन आज आपकी पार्टी में २ सीटो को दे गया होता भाई ओने मन शो नहीं चलता है कामो को बाताना पड़ता है खाई मगर वोते % बढ़िया रहा है आपका इंशा अल्लाह हम दोनों अगर मेरा हौसला (जो अब टूटा हुवा लग रहा है) कायम रहा तो साथ काम कर सकते है 
सोसिअल देमोकरेतिक पार्टी ऑफ़ इंडिया : इस पार्टी ने दस सीटो पर इलेक्शन लडवाया मगर मुगालते में बैठे inkey सूबे के सदर साहेब ने माशा अल्लाह इतना वोट पाया कि मशीने ख़राब हो गई गिन नहीं पा रही थी log गिनती bhool gaye और वो वोट था २७६ जिसमे से लगभग मेरे खाते का १००-१५० था जो मैने उनसे बिना मिले अपने जानने वालो को कहकर दिलवाया था पुरी इलेक्शन में लगा ही नहीं कि ये साहेब खुद भी चुनाव लड़ रहे है बस ऐसा लगा कि भाई साहेब कांग्रेस के डमी candidate है मेरी रफीक भाई से बात हुई थी उनके वालिद मोहतरम से भी मेरी गुफ्तगू हुई थी मैने उनके मुहब्बत कि वजह से इनसे फ़ोन पर बात कि भाई साहेब ने सलाम दुवा के बाद मुझसे कहा कि आप कहा है मैने बताया कि मै अभी कानपुर में हु साहेब इन्हों ने इरशाद फ़रमाया कि आप मेरे घर पर आइये बैठ कर बाते होती है भाई मेरी अना mujhey जाने से रोक लुया और मै गया जी नहीं वैसे ये भाई साहब इतना ज़रूर जानते है कि अगर हम दोनों साथ में chaltey तो ये वोट shayad हज़ार में होता ............
IUML :- मुस्लिम लीग नाम से मशहूर ये पार्टी कि कमान थी जनाब अनवर चौहान साहेब के हाथो में उनसे मेरे अपने सिर्फ कुछ वसूलो का टकराव था वो भी उनके कुछ लडके टाइप के कार्यकर्ताओ कि वजह से वरना अनवर चौहान साहेब ने मेहनत काफी कि थे मगर चुनाव के पहले ही भाई साहेब को हटा कर उनके एक दरबारी को बागडोर दे दी गई नतीजा क्या हुवा पार्टी कही से चुनाव ही नहीं लड़ पी जबकि हकीकत ये भी है कि मैने अपने candidates नहीं लाद्वाई थे कि अनवर साहेब को मै समर्थन देकर एक को निकलवा दूंगा हुवा उल्टा न मै लड़ सका न वो लड़ सके खैर हम दोनों ही काफिले कि गुबार देखते रहे
अब बाते मुसलमानों कि हम लोगो कि itani मेहनत थी कि सिर्फ आप अपने पार्टी को वोट दे मगर ८० सीटो पर लादे कौमी एकता दल के गटबंधन को सिर्फ २ सीटे मिल पाई बाकि जगह में से ३ छोड़ कर कही भी ५००० पार नहीं कर पाई ओलिमा काउन्सिल के आमिर रशदी साहेब जैसे भी हो लगभग ३५ सीट लडे एक दो को छोड़ कर कही वो हज़ार का अकड़ा भी पार नहीं कर पाये क्या यही थी हम लोगो कि मेहनत जो हम लोगो ने सालो से कि 
अब फैसला आप करो कि हौसला हमारा टूटना चाहिए या नहीं