Wednesday, 14 December 2011

ऋग्वेद में गोमांस भक्षण

अक्सर ये देखा जाता है की गौमॉस पर लोग लम्बी चौड़ी बाते करते है हमारे मज़हब को गलत कहते है मैने उनको कई बार जवाब भी माकूल दिया है मै एक दिन इसपर अध्यन कर रहा था की अचानक मुझे एक ऐसा मौका मिला ऐसे लोगो को जवाब देने का जिसे मै खोना नहीं चाहता था मुझे गोमास भक्षण का सबूत मिल गया है रिग्वेद में गौमांस भक्षण तक का उदहारण आया है आप खुद देखिये यहाँ मै उचित शब्दार्थ के लिए 
द कम्पलीट वर्क आफ स्वामी विवेकानंद . वोल्यूम 3 को शाक्षी रख कर अपनी बाते रख रहा हु जिसके पृष्ट संक्या 174, और ५३६ का वर्णन कर रहा हु  जिसमे महान हिन्दू धर्म के  स्वामी विकेकानन्दजी ने ऋग्वेद का वर्णन किया है 
 
"उक्षणों ही में पंचदंश साकं पंचंती: विश्तिम् |
उताहंमदिंम् पीव इदुभा कुक्षी प्रणन्ती में विश्व्स्मान्दिन्द्र ||" (उत्तर ऋग्वेद 10-86-14 )
र्थात :- इन्द्राणी द्वारा प्रेरित यज्ञकर्ता मेरे लिए 15-30बैल काटकर पकाते है , जिन्हें खाकर मै मोटा होता हू |वे मेरी कुक्षियो को सोम (शराब ) से भी भरते है | (ऋग्वेद 10-86-14 ) 
यहाँ धयान दीजियेगा की बैल को पका कर खाने का वर्णन है बैल नरगए को कहते है न यानि गोमाता के पति या पुत्र को
"मित्र कूवो यक्षसने न् गाव: पृथिव्या |
आपृगामृया शयंते ||" (ऋग्वेद 10-89-14 )

अर्थात :- हे ! इन्द्र जैसे गौ वध के स्थान पर गाये कटी जाती है वैसे ही तुम्हारे इस अस्त्र से मित्र द्वेषी राक्षस कटकर सदैव के लिए सो जांए |(ऋग्वेद 10-89-14 ) यहाँ धयान दे की गोवध की बात कही गयी है
"आद्रीणाते मंदिन इन्द्र तृयान्स्सुन्बंती |
सोमान पिवसित्व मेषा ||"

"पचन्ति ते वषमां अत्सी तेषां |
पृक्षेण यन्मधवन हूय मान : ||" (ऋग्वेद 10-28 -3 )

अर्थात :- हे ! इन्द्र अन्न की कमाना से तूम्हारे लिए जिस समय हवन किया जाता है उस समय यजमान पत्थर के टुकडो पर शीघ्रताशीघ्र सोमरस (शराब ) तैयार करते है उसे तुम पीते हो ,यजमान बैल पकाते है और उसे तुम खाते हो | (ऋग्वेद 10-28-3 )
यहाँ धयान दीजिये की केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि आपके इन्द्र भगवन भी गौमांस भक्षण करते है
अब आप निर्णय करो की स्वामी जी ने गलत लिखा है या सही मै तो कहूँगा की स्वामी जी ने एकदम सत्य लिखा है और उनकी बातो का समर्थन करता हु आप बताए |

46 comments:

  1. इसके लिए आपने मेहनत की यह अच्छी बात है.बहुत से हिन्दू इस बात को नहीं जानते हैं कि गौ मांस खाना एक सामान्य बात रही है. सभी यज्ञ में बलि के लिए गाय काटी जाती थी चाहे वो राम के द्वारा किया गया यज्ञ हो या कृष्ण उसमे भाग ले रहे हो. बाद में बलि को ही पका कर परसा जाता था

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    1. Bhai adhura gyan hamesha dukhdai hota hai. pagle Rishi Dayanand ki Satyarth Prakash tatha Rigvedadi Bhasya Bhumika patho. Uske bad apna tark tyar karna. Vivekanand to paschatya Sanskriti se prerit tha usne to vedo ka arth nahi anarth kiya tha jiske karan aaj ke nojawan bhatkte hain. Gomegh Yagna ka matlab Go vadh se nahi balki budhipurvak sudhvani se yagna karna hai. Agar nahi pata to pahle Satyarth Prakash padho ya hamare do diwsiya satra ki bahash m bhag lo agar aap ki baat sahi hui to ham bhi tumhare sath ho jayenge nahi to tum hamare saath ho jana.

      Apne muslim bhaiyon se Arbi me Hindu sabd ka arth puchhna tab tumeh apne ko hindu kahne main bhi lajja aayegi. Hindu ka arth hota hai Kala, Kafir, Chor or lutera. parantu ye paschatya shiksha vale kate hain ki muslim Sindu nadi ko hindu nadi kahte the kyoki vo s ko hai bolte the unse puchhna ki muslman sindh prant ko hind prant kyon nahi kate.

      in bathon par dhyan do
      1. Muslim desho m shanti kyon nahi h.
      2. vahan sarkaren kyon gir jati hain.
      3. agar muslim sanvidhan Kuran hi sacha sanvidhan hai to 1600 sal se pahle ye duniya bina sanvidhan k chanl rahi thi.

      Jai Arya , Jai Aryavart

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    2. Mera name Ram Narayan CHANDEL hai.
      Mai aapki bat se sahmat hoon. Kuch akl k dushmanon ko kuch bhi Pta nhi fir bhi mante nhi li Sanatan hi sarshreshth hai

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  2. bahut khub ...!!! aap ke pryaas se bahut purana jawaab mil gaya hai..!! hamare hindu bhai gumrah hai ...! unhe to apne dharm ke bare me bhi nahi maloom ...!

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    1. धर्म के पीछे आर्थिक, सामाजिक, और मनोविज्ञानिक तर्क छुपे होते हैं, जिसे समझे बिना बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल पाते. धर्म को समझने का उत्साह खुद के लिये भी जरूरी है, सिर्फ दूसरों को आघात पहुँचाने के लिये किया गया शोध समाज में सिर्फ नकारात्मक प्रभाव फैलाता है. बाकी, नीचे भी देख सकते हैं !

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  3. badhiya hai lekin ise zero jaise fb group me bhejne se kuch fayda nahi kyuki wo fir mazhabe islam par galat aur vahiuyat comments karte hain

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  4. Rigved ke 1st Mandal me Mans bhakshan ka nishedh kiya gaya he wo mantra bhi to likh dijiye. Q dusro ko nicha dikhane ki koshish me swayam hi niche gir jate ho???

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  5. It is foolishness to read few lines in between and concluding that sacrifices ( bali system ) were for satisying taste buds , explanation of lines can only done by going through context start to end, How it can be concluded that SOM is sharab ( Whisky) ,In Vedas there is description that SOM was made up of Gur,Leaves , Butter,Milk etc -what kind of sharab is this.Similarly sacrifices have very broad meaning which can not be understood by a person who is fond of eating garbage etc

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. सम्भवतः, गोमांश-भक्षण आर्यों के बीच आरंभ में, उस समय प्रचलित रहा हो, जब वो मध्य-एशियायी खाना-बदोश जीवन जी रहे थे. ऋक वेद का सबसे पुराना भाग आर्यों के भारतीय भूमि में प्रवेश से पहले रचित माना जाता हैं. इसके सबूत हमें ऋग्वैदिक देवताओं का पश्चिम एशिया के कुछ अभिलेखों में वर्णन के रूप में मिलता है. खानाबदोश जीवन में गोवंश का महत्व कृषि के सापेक्ष बहुत कम था. ऐसा माना जाता है, कि भारतीय भूमि में कृषि के विकास के साथ गोवंश का महत्व काफी बढा, और इसके परिप्रेक्ष्य में मांस के लिये इसकी हत्या का विरोध बढने लगा. साथ ही, यह गौर करने की बात है, कि ठंडे प्रदेश में मांसाहार का महत्व, भारतीय सन्दर्भ में बदल जाता है. सम्भव है, कि भारतीय जलवायु में गोमांश भक्षण का मानवीय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी लोगों में इसके विपरीत जाने को बाध्य किया हो. इसका सबूत यह है, कि भारत में जन्में सभी पंथों में अहिंसा का महत्व रहा है. आर्यों के भारत आगमन के बाद ऋग्वेद के वे बाद वाले अंश, और अन्य तीनों वेदों, वेदांत और वेदांगों में गोवंश को अघ्न्या मानकर वर्णन आया है. आर्यों से पहले भारत में बसी हुई संस्कृतियों का आर्यों के साथ मिलकर जो सांस्कृतिक स्वरूप सामने आया, वही मुख्यरूप से आज की हिन्दू धर्म की मान्यताओं में स्थापित पाई जाती हैं. भारत आने से पहले के आर्य, भारत में आकर यहाँ के पूर्व-वासित लोगों के साथ –हिन्दू-संस्कृति का विकास करने वाले आर्य, इन दोनों को भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अलग कर के देखना पड़ेगा. भारत में आर्य-संस्कृति वास्तव में आर्यों एवं, आर्यों से पूर्व से स्थापित हिन्दुओं के सम्मिश्रण से उत्पन्न हुआ है. इस अंतर को तो ऋग्वेद और अन्य वेदों की विषय-वस्तु में अंतर से ही समझा जा सकता है. सिन्धु-घाटी सभ्यता के लोगों की धार्मिक आस्था, आर्यों की मूल आस्था से काफी भिन्न मालूम पड़ती हैं. वृक्षों, पशुओं, मातृदेवों, पशुपति, लिंग-पूजा आदि आरम्भिक आर्य-संस्कृति में नहीं पाया जाता. मूर्ति-पूजा, स्तूप-पूजा जैसी चीजें भी आरम्भिक आर्य-संस्कृति का हिस्सा नहीं थी.
    अत:, आरम्भिक भारतीय भूमि में प्रवेश से पहले की आर्य-संस्कृति, भारत भूमि पर आर्य-संस्कृति के बीच अंतर को समझने के बाद, गोमांसाहार और उसके प्रति वर्जना को अच्छी तरह समझा जा सकता है. भारतीय आर्य-संस्कृति का इस भूमि में पूर्व से स्थापित संस्कृतियों से मिलन के बाद जो संस्कृति उभरकर आती है, उसमें गोमांश एक वर्जना के रूप में सामने आता है. अतः, हिन्दू संस्कृति में पाई जाने वाली यह वर्जना, सम्भवतः सिन्धु-घाटी सभ्यता के योगदान से पैदा हुई.

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  8. भाइयो ऋग्वेद या किसी भी वेद में अगर ये लिखा हा की गोमांस खाना सही है तो कुरान में कहा लिखा है की गोमांस का ही भक्षण करो गाय अगर किसी धरम में पवित्र है तो जरुरी नहीं की मजहबी बातो को बढ़ावा देने के लिए उसका भक्षण किया जाये आज अगर हमारे आस पास कोई मर जाये तो क्या आप लग जश्न मानते हो नहीं न फिर इतनी लम्बी चौड़ी बाते क्यों आज खाने के लिए बहुत कुछ है फिर गाय ही क्यों सुवर क्यों नहीं मांस भी बहुत अच्छा होता है ज्यादा होता है आज इतनी लम्बी चौड़ी बाटे लिखे वाला ये इंसान कहा से ऋग्वेद पढ़ आया कोनसे पंडित से इसने संस्कृत सीखी ? पहले इस बात का जवाब दे फिर मै बताऊंगा की ऋग्वेद में क्या लिखा हुआ है

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  9. yahan baith kar faltu bate kar ke apne jiwan ko bekar karne se jyda accha hi kisi majloom ki madad karo...

    jin ke peet bhare hote hai sirrf or sirrf un logo ko hi ladai karane ya uksane ka time milta hia...

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  10. यह बहस का मुद्दा ही नहीं है। जब तक किसी बात की तह तक नहीं जाया जाएगा, तब तक ऊपरी बातों से कयास लगाने से क्या मतलब! वेदों में कही गई उस बात का सही अर्थ समक्षें, उसे पूरी तरह जानें तब कोई अपनी राय दें तो बेहतर रहेगा।

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  11. यह बहस का मुद्दा ही नहीं है। जब तक किसी बात की तह तक नहीं जाया जाएगा, तब तक ऊपरी बातों से कयास लगाने से क्या मतलब! वेदों में कही गई उस बात का सही अर्थ समक्षें, उसे पूरी तरह जानें तब कोई अपनी राय दें तो बेहतर रहेगा।

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  12. मामद तारिक क्या वेद मे अर्थ के साथ गोवध लिखा हे ??

    या तुने अर्थ निकाला ??

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  13. ये मुर्ख लोगो के द्वारा अर्थ निकाले गए है।कहाँ पर,किस अर्थ से,पूरा अध्ययन करें तब पता चले।हिन्दू द्वेष से जो भी अर्थ निकलेगा वह गलत ही होगा।श्रद्धा व अपने कल्याण के निमित्त जो अर्थ निकलेंगे वही अर्थ सही है।
    जिसे केवल समाज में जहर फेलाना हो,अपना विनाश करना हो वह ऐसे व्यर्थ के अर्थ निकालकर अपनी कुबुद्धि का परिचय देते है और जिन्हें अपना व अपने संपर्क में आने वालो का मंगल करना हो,समाज को जोड़ना हो,दुर्लभ मनुष्य जीवन इस संसार की सेवा में लगातार उन्नत करना हो ऐसे लोग धन्य है।भगवान करे आपकी बुद्धि सात्विक हो जिससे आपसे अच्छे कार्य होने लगे..।

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  14. मुर्ख लोगो के द्वारा अर्थ निकाले गए है।कहाँ पर,किस अर्थ से,पूरा अध्ययन करें तब पता चले।हिन्दू द्वेष से जो भी अर्थ निकलेगा वह गलत ही होगा।श्रद्धा व अपने कल्याण के निमित्त जो अर्थ निकलेंगे वही अर्थ सही है।

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  15. हिंदू कोई धर्म नहि हे ।
    ये मात्र विदेशी आर्यो द्वारा भारतिय मूलनिवासियों को गुलाम बनाये रखने का षडयंत्र मात्र हे।हिन्दू कहलाने वाली कम्यूनिटी मनूस्म्रती की देन चातूरूवर्ण को मानति हे जो की अमानविय हे ।पशू ओर इंसान में मात्र एक ही अंतर होता हे बूद्धी का ओर बूद्धी शिक्षा से आती हे हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनूसार शूद्रों एवं नारियों को चाहे किसी भी वर्ण की हो ईन्हे शिक्षा ग्रहण करने का कोई अविकार ही नही था।
    तो क्या हमें हिन्दू को धर्म कहना चाहीये?
    कोई जो अपने आप को हिन्दू कहता हे,उससे मेरा एक ही प्रश्न हे की वो हिन्दू धर्म की कोई एसी परिभाषा दे की उसे सभी हिंदू कहे जाने वाले स्विकार कर लेवे।मेरा दावा हे की कोई हिन्दू की परिभाषा नही दे सकता।

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  16. प्राचीन काल में हिन्दू गोमांस खाते थे'
    14 अप्रैल 2016
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    भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माताओं में से एक डॉक्टर बीआर अंबेडकर अच्छे शोधकर्ता भी थे. उन्होंने गोमांस खाने के संबंध में एक निबंध लिखा था, 'क्या हिंदुओं ने कभी गोमांस नहीं खाया?'
    यह निबंध उनकी किताब, 'अछूतः कौन थे और वे अछूत क्यों बने?' में है.
    दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर शम्सुल इस्लाम ने इस निबंध को संपादित कर इसके कुछ हिस्से बीबीसी हिंदी के पाठकों के लिए उपलब्ध करवाए हैं.
    'पवित्र है इसलिए खाओ'
    Image copyrightAP
    अपने इस लेख में अंबेडकर हिंदुओं के इस दावे को चुनौती देते हैं कि हिंदुओं ने कभी गोमांस नहीं खाया और गाय को हमेशा पवित्र माना है और उसे अघन्य (जिसे मारा नहीं जा सकता) की श्रेणी में रखा है.
    अंबेडकर ने प्राचीन काल में हिंदुओं के गोमांस खाने की बात को साबित करने के लिए हिन्दू और बौद्ध धर्मग्रंथों का सहारा लिया.
    उनके मुताबिक, "गाय को पवित्र माने जाने से पहले गाय को मारा जाता था. उन्होंने हिन्दू धर्मशास्त्रों के विख्यात विद्वान पीवी काणे का हवाला दिया. काणे ने लिखा है, ऐसा नहीं है कि वैदिक काल में गाय पवित्र नहीं थी, लेकिन उसकी पवित्रता के कारण ही बाजसनेई संहिता में कहा गया कि गोमांस को खाया जाना चाहिए." (मराठी में धर्म शास्त्र विचार, पृष्ठ-180).
    अंबेडकर ने लिखा है, "ऋगवेद काल के आर्य खाने के लिए गाय को मारा करते थे, जो खुद ऋगवेद से ही स्पष्ट है."
    Image copyrightAP
    ऋगवेद में (10. 86.14) में इंद्र कहते हैं, "उन्होंने एक बार 5 से ज़्यादा बैल पकाए'. ऋगवेद (10. 91.14) कहता है कि अग्नि के लिए घोड़े, बैल, सांड, बांझ गायों और भेड़ों की बलि दी गई. ऋगवेद (10. 72.6) से ऐसा लगता है कि गाय को तलवार या कुल्हाड़ी से मारा जाता था."
    'अतिथि यानि गाय का हत्यारा'
    अंबेडकर ने वैदिक ऋचाओं का हवाला दिया है जिनमें बलि देने के लिए गाय और सांड में से चुनने को कहा गया है.
    अंबेडकर ने लिखा "तैत्रीय ब्राह्मण में बताई गई कामयेष्टियों में न सिर्फ़ बैल और गाय की बलि का उल्लेख है बल्कि यह भी बताया गया है कि किस देवता को किस तरह के बैल या गाय की बलि दी जानी चाहिए."
    वो लिखते हैं, "विष्णु को बलि चढ़ाने के लिए बौना बैल, वृत्रासुर के संहारक के रूप में इंद्र को लटकते सींग वाले और माथे पर चमक वाले सांड, पुशन के लिए काली गाय, रुद्र के लिए लाल गाय आदि."

    "तैत्रीय ब्राह्मण में एक और बलि का उल्लेख है जिसे पंचस्रदीय-सेवा बताया गया है. इसका सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, पांच साल के बगैर कूबड़ वाले 17 बौने बैलों का बलिदान और जितनी चाहें उतनी तीन साल की बौनी बछियों का बलिदान."
    अंबेडकर ने जिन वैदिक ग्रंथों का उल्लेख किया है उनके अनुसार मधुपर्क नाम का एक व्यंजन इन लोगों को अवश्य दिया जाना चाहिए- (1) ऋत्विज या बलि देने वाले ब्राह्मण (2) आचार्य-शिक्षक (3) दूल्हे (4) राजा (5) स्नातक और (6) मेज़बान को प्रिय कोई भी व्यक्ति.
    कुछ लोग इस सूची में अतिथि को भी जोड़ते हैं.
    मधुपर्क में "मांस, और वह भी गाय के मांस होता था. मेहमानों के लिए गाय को मारा जाना इस हद तक बढ़ गया था कि मेहमानों को 'गोघ्न' कहा जाने लगा था, जिसका अर्थ है गाय का हत्यारा."
    'सब खाते थे गोमांस'

    इस शोध के आधार पर अंबेडकर ने लिखा कि एक समय हिंदू गायों को मारा करते थे और गोमांस खाया करते थे जो बौद्ध सूत्रों में दिए गए यज्ञ के ब्यौरों से साफ़ है.
    अंबेडकर ने लिखा है, "कुतादंत सुत्त से एक रेखाचित्र तैयार किया जा सकता है जिसमें गौतम बुद्ध एक ब्राह्मण कुतादंत से जानवरों की बलि न देने की प्रार्थना करते हैं."
    अंबेडकर ने बौद्ध ग्रंथ संयुक्त निकाय(111. .1-9) के उस अंश का हवाला भी दिया है जिसमें कौशल के राजा पसेंडी के यज्ञ का ब्यौरा मिलता है.
    संयुक्त निकाय में लिखा है, "पांच सौ सांड, पांच सौ बछड़े और कई बछियों, बकरियों और भेड़ों को बलि के लिए खंभे की ओर ले जाया गया."
    अंत में अंबेडकर लिखते हैं, "इस सुबूत के साथ कोई संदेह नहीं कर सकता कि एक समय ऐसा था जब हिंदू, जिनमें ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण दोनों थे, न सिर्फ़ मांस बल्कि गोमांस भी खाते थे."
    (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

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    1. श्रीमान मोहन जी
      आर्य बाहर से आये हैं यह सिदांत बदल गया हैं
      हम पाश्चिमात्य विदवानो मानने वाले कुकुर हैं
      अभी उन्होने नया सिदांत दिया हैं आर्य का मूल निवास भारत वर्ष ही है थोडा दिमाग लगाकर गूगूल में सर्च करो

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  17. It is matter of past.at present you kill human being because he is of other caste ,religion, culture and Faith. On the name of religion you kill innocent child ,women,weak person is it right? Is it religion? To help other without any lust is true religion.

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  18. It is matter of past.at present you kill human being because he is of other caste ,religion, culture and Faith. On the name of religion you kill innocent child ,women,weak person is it right? Is it religion? To help other without any lust is true religion.

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  19. It is matter of past.at present you kill human being because he is of other caste ,religion, culture and Faith. On the name of religion you kill innocent child ,women,weak person is it right? Is it religion? To help other without any lust is true religion.

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  20. Adami ko itna nahi gire....ki...? god ko bhi sharam ane lage ki Maine मुर्ख लोगो Ko janam Kyu diya...

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  21. Adami ko itna nahi gire....ki...? god ko bhi sharam ane lage ki Maine मुर्ख लोगो and dharmaheen Ko janam Kyu diya...

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  22. Are MadarChodo Rigved me aisa kuch nahi likha tum sab Sanatan(HINDU) dharm ko badnam kyo kar rahe ho....

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  23. अरे ..... किसी भी धर्म मे जीव हत्या करना नहीं लिखा ....अगर किसी गर्ंथ मे लिखा है तो गलत है...

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  24. अरे ..... किसी भी धर्म मे जीव हत्या करना नहीं लिखा ....अगर किसी गर्ंथ मे लिखा है तो गलत है...

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  25. यहाँ मैं टिप्पणियाँ नहीं देना चाहता हूँ सिर्फ श्रीमान आस्तिक जी का लेख पेस्ट कर रहा हु उत्तर इस प्रकार हैं वह पढ़ लो तो आपका संस्कृत ज्ञान किस प्रकार हैं उसपर मंथन कर ले
    बाकि महोदय आप लोग भी कॉमेंट देने से पहले स्वामी दयानंद जी का भाष्य पढ़ ले
    इस ब्लॉग मास्टर के लिये एक कुलीन शब्द हैं स्वर्णपात्र में नरोटि तो ब्लॉग मास्टर इस शब्द को ढूढ़ कर वापस कॉमेंट देना आपको इसी गूगूल संसार से एक अच्छी सी भेट पेस्ट कर देंगे
    धन्यवाद
    ॐ श्री महा गणेशाय नमः महाज्ञानी जी का लिखा श्लोक अशुद्ध है अनेक गलतियाँ हैं इनहोने लिखा है
    "आद्रीणाते मंदिन इन्द्र तृयान्स्सुन्बंती सोमान पिवसित्व मेषा ||"
    "पचन्ति ते वषमां अत्सी तेषां पृक्षेण यन्मधवन हूय मान : ||" (ऋग्वेद 10-28 -3 )

    जबकि श्लोक यह है -
    अद्रिणा ते मन्दिन इन्द्र तुयान्त्सुन्वन्ति सोमान्पिबसि त्वमेषाम ।
    पचन्ति ते वृषभाँ अत्सी तेषां पृक्षेण यन्मधवनहूयमान : ।। (ऋग्वेद 10-28 -3 )

    एक ही श्लोक मे अनेक गलतियाँ है जिससे अर्थ का अनर्थ हो जाता है और इसका अर्थ है - ( ऋषि का कथन ) हे इन्द्र देव ! आपके लिए पाषाण खंडों पर शीघ्रतापूर्वक अभिषवित आनंदप्रद सोम को जब यजमान लोग तैयार करते हैं , एसे मे आप उनके द्वारा प्रदत्त सोमरस का पान करते हैं । हे एश्वर्य सम्पन्न इन्द्र देव ! जिस समय सत्कार-पूर्वक हविष्यन्नों से यज्ञ किया जाता है , उस समय साधक गण वृषभ ( शक्ति सम्पन्न हव्य ) को पकाते ( हविष्यान्न को यज्ञ मे अंगारों पर भूनने की क्रिया ) है और आप उनका सेवन करते हैं

    यंहा यह भी नही भूलना चाहिए की एक राशी का नाम भी वृष है वंहा भी कोई 4 पैरों वाला जीव नही है ।हिंदुओं मे सभी देवताओं और उनके वाहनो के नाम गुणो के आधार पर रखे गए हैं ।

    संस्कृत शब्दकोश से वृषभ के सभी अर्थ लिख रहा हूँ

    वृषभ vRSabha m. ox
    वृषभ vRSabha m. bull
    वृषभ vRSabha adj. vigorous
    वृषभ vRSabha adj. strong
    वृषभ vRSabha adj. manly
    वृषभ vRSabha adj. mighty
    वृषभ vRSabha m. zodiacal sign Taurus
    वृषभ vRSabha m. most excellent or eminent
    वृषभ vRSabha m. bullock
    वृषभ vRSabha m. Mucuna Pruriens
    वृषभ vRSabha m. chief edit
    वृषभ vRSabha m. of the 28th muhUrta
    वृषभ vRSabha m. hollow or orifice of the ear
    वृषभ vRSabha m. particular drug
    वृषभ vRSabha m. lord or best among

    अब सभी को विश्वाश हो जाएगा की में सही कह रहा हूँ या नही
    इसके आगे तो विवेकानंद का भी ज्ञान संकुचित दिखता है मेरी माँ कहती थी उन्होने की मेरे गर्भ मे होने के समय विवेकानद की किताबें पढ़ी तो मुझे लगता है मेरे साथ बहुत बड़ा छल हो गया है इसकी जगह यदि किसी धर्म ग्रंथ और ऋषि मुनि की किताब पढ़ी जाती तो में आज और भी अधिक गुणवान और ज्ञानवान होता है मुझे बहुत दुख है मेरे साथ हुये इस छल का ,में एसे सभी मूर्खों का मुह बंद करके निश्चय ही इस कमी को पूरा करूंगा

    ब्राह्मणो की जय हो अब्राह्मणो का नाश हो


    ब्राह्मणो की जय हो अब्राह्मणो का नाश हो अर्थात में सभी को उस स्थान पर देखना चाहता हूँ ब्राह्मण का उद्देशया सुधार है न की विनाश यह तो अंतिम रास्ता है जो देवताओं के द्वारा किया जाता है

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  26. बाकि मंत्रो का भी अर्थ गूगूल संसार में चाहो तो पेस्ट कर देता हु और
    बाकि सभी स्वर्ण पात्र में नरोटि यो को
    गं गणपतये

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    1. अति उत्तम्

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  27. अगर यही बात है तो आप डॉ भीमराव अम्बेडकर से भी ज्ञानी है उनको भी संस्क्रत का नही था अगर आप उस समय होते तो शायद यह बहस का विषय ही नही होता

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  28. अगर यही बात है तो आप डॉ भीमराव अम्बेडकर से भी ज्ञानी है उनको भी संस्क्रत का नही था अगर आप उस समय होते तो शायद यह बहस का विषय ही नही होता

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  29. अगर यही बात है तो आप डॉ भीमराव अम्बेडकर से भी ज्ञानी है उनको भी संस्क्रत का नही था अगर आप उस समय होते तो शायद यह बहस का विषय ही नही होता

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  30. विदेशी आकांताओं और लुटेरों के कुचक्र में फंसा भारत का बुद्धिजीवी जिसकी सनातन संस्कृति के प्रमाण सम्पूर्ण विश्व में मिल रहे हैं, आज वह वास्तविकता को जाने बिना अंग्रेजों द्वारा अपनी खोज को विश्वसनीय मानता है। आज आर्यों को बाहर का बतलाने वाले अब उन्हें भारत का बता रहे हैं, कल कहीं और का बताएंगे तो वही मान लेना क्योंकि तुम्हारे पास तो अक्ल है नहीं कि सारी खोजें आर्यों और उनके धर्मग्रंथों की ईर्द-गिर्द क्यों घूमती हैं? संस्कृत को तो आक्रमणकारियों द्वारा बहुत पहले नष्ट किया जा चुका है बाकि जो बचा है वह ऐसे अधर्मियों द्वारा हो जाएगा जो अपने पूर्वजोंं के सत्यापन के लिए बाहरी लोगों की ओर देखते हैं।

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  31. महाराज पूर्ण और असली वेद तो पढ़ पाना ही नामुमकिन है ये कौन लोग हैं जो इसकी ब्याख्या करते है वो कहां से सीखे क्या सीखे उसमे खुद के मन की और स्वार्थ की बातें कितनी थी और कितनी बातें सत्य थी कौन जनता है इसलिए किसी धर्म की गलत तुलना करना महापाप है आये तो थे इंसान बनके और उस परमात्मा को खोजने की बजाय माया में अंधे होकर अज्ञान की अग्नि में खुद को झोंककर उस परमात्मा पर कीचड़ उछाल रहे हो जिसके लिए तुम एक मिट्टी मात्र हो जो अगर खिलौना बनाना जानता है तो उसे बापस मिट्टी बनाना भी जानता है

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  32. मेरी मुस्लिम भाइयो से अपील है की वो जाकर अपने धर्म की बातों पे गौर दें तुम इस्लाम पढ़ो चाहे क़ुरान क्या हम तुमसे ये पूछने आये की तुम्हारे नवी ने अपनी 9 साल की बेटी से संभोग किया तो तुम क्यों नही करते??
    ये महज एक दूसरे के धर्म को गाली देना है इस्लाम आया है मात्र 2000 साल पहले और हमारे धर्म में तो लाखो अरबो साल पहले तक की उत्पत्ति और फिर विनाश तक के बारे में लिखा है लेकिन पढ़े कौन ये हक़ीक़त है की तुम अपने धर्म के प्रति वफादार हो आपके हर एक मुस्लिम भाई ने यहां कमेन्ट में इस्लाम का समर्थन किया है लेकिन हमारे धर्म के कुछ लोग तुम्हारी इस बात पे समर्थन कर बैठे लेकिन सत्य कितनो ने जान ना चाहा किसी ने क्या पब्लिश कर दिया वो पढ़ लिया मान लिया जाओ पहले संस्कृत सीख कर उच्च कोटि की फिर असली बेद पढ़ो तब निरीक्षण करना दुसरो के प्रश्नों का तुम्हें कोई अधिकार नही किसी धर्म की बातों का विश्लेषण करने का अगर कभी तुमने उसको जाना ही नही।। हिन्दू धर्म पूर्ण रूप से जानवरों पर होने वाली हिंसा के विरुद्ध है गौ माता के तो अभी गुणों का ही पता नही तुम लोगों को

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  33. Suar ek esa janvar he jo bakri ki noiyat se aata aur isme darindagi bhi pai jati aur ye dusre janvar bhi khajata
    Isi kaaran suar insaani khane ke liye thik nahi he

    Gaay bakri bakra bhensa katra ye sab ghas patti khate he aur inme darindagi nahi pai jati aur ye dusre janvar ko nahi khate isi liye ye insaani khane ke liye sahi he
    Insaan jo kuch bhi khata he uska asar uspar parta he yani insaan ek darinde janvar ko khayega to darindagi hi usme zahir hogi
    Aur gaay bakra bhensa katra ye saant svabhav ke janvar he inko khane se insani jism par sirf bal dikhai deta darindagi nahi

    I hope you're understand

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  34. और ज्यादा तैयारी से डिबेट करें


    प्रामाणिक बात को स्वीकार करे चाहे किसी भी धर्म की हो।

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  35. और ज्यादा तैयारी से डिबेट करें


    प्रामाणिक बात को स्वीकार करे चाहे किसी भी धर्म की हो।

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  36. भाई तब तो इस्लाम ही नही था । तब लोग अल्लाह का नाम ही नही सुने थे तब आज क्यों चिल्लाते हो अल्लाह अल्लाह

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  37. तुम्हारी बाते हम सिरे से खारिज करते हैं हवाला दीजिये तब मानेंगे।
    हमने भी आज तक नह पूछा की ब्रह्म ने अपनी बेटी की सुन्दरता से आकर्षित होकर सरस्वती से विवाह क्यों किया।
    इंद्र ने अहिल्या का बलात्कार किया।
    द्रोपदी ने 5 मर्दो के साथ संभोग किया।
    हमे इससे क्या लेना ऐसे धर्म का नाम भी लेना गुनाह है।
    मेरे भाई अपनी कमियों को नजरअंदाज करके दुसरो में जो कमी खोजता है वो महामूर्ख होता है।

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  38. tumhari maa ka bosda katuo bhan ki chut tumhar

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  39. go through..... www.onlineved.com

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